भारत का संविधान कब लागू हुआ - Bharat ka samvidhan kab lagu hua

इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपके लिए भारतीय संविधान से जुड़ी अहम जानकारी लेकर आए है. भारत के नागरिक होने के नाते सभी को संविधान के बारे में बेसिक जानकारी जरूर होना अनिवार्य है इसलिए इस आर्टिकल में संविधान से जुड़े निम्नलिखित topics कवर किए गए है जिनके बारे में पता होना हर भारतीय के लिए आवश्यक है

संविधान का अर्थ एवं परिभाषा 

भारत का संविधान कब लागू हुआ

भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को क्यों लागू हुआ? 

भारतीय संविधान के निर्माण में कितना समय लगा? 

भारतीय संविधान के लेखक कौन है? 

भारत की संविधान सभा के अध्यक्ष कौन थे? आदि 

यदि आप इन सभी सवालों के उत्तर ढूंढ रहे है तो आपको सभी सवालों के जवाब इस एक ही आर्टिकल में मिल जाएंगे तो चलिए सबसे पहले जानते है भारत का संविधान कब लागू हुआ जानने से पहले संविधान का अर्थ एवं परिभाषा को समझते हैं.

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संविधान का अर्थ एवं परिभाषा 


संविधान वह दस्तावेज़ होता है जिसके आधार पर किसी भी देश की शासन विवस्था संचालित की जाती है. आसान भाषा में कहा जाए तो संविधान से तात्पर्य नियमों और कानूनों के उस दस्तावेज से है जिसकी एक विशिष्ट विधि पवित्रता होती है जो सरकार के अंगों जैसे कि कार्यपालिका, विधायिका और न्यायापालिका के ढांचे और कार्यों को निर्देशित करता है.

संविधान के आधार पर ही किसी देश की सरकार, न्याय विवस्था एवं नागरिकों के अधिकार और कर्तव्य निर्धारित किए जाते है इसके अतिरिक्त संविधान ही सरकार के अंगों (कार्यपालिका, न्यायापालिका और विधायिका का मार्गदर्शक) होता है.

संविधान का अर्थ 

संविधान शब्द की उत्पत्ति फ्रेंच और लेटिन भाषा से मानी जाती है. Constitution शब्द " लैटिन भाषा के शब्द "Constitutio" से बना है जिसका अंग्रेजी में अर्थ regulations or orders होता है. हिंदी में इसके अर्थ विनियम या आदेश किए जाते है.

भारत का संविधान कब लागू हुआ


जैसा की बताया जा चुका है कि संविधान एक ऐसा दस्तावेज़ है जिसके आधार पर किसी देश की राज्य विवस्था चलाई जाती है. अंग्रेज़ों के भारत छोड़कर चले जाने के बाद भारत को 15 अगस्त, 1947 को सवतंत्रता प्राप्त हुई उसके बाद देश में क़ानून विवस्था संचालित करने के लिए 26 जनवरी, 1950 को भारत का संविधान लागू किया गया इसलिए भारत में 26 जनवरी का दिन प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस (Republic day) के रूप में मनाया जाता है.

भारत की संविधान सभा का पहला अधिवेशन 9 दिसंबर, 1946 को पूरा हुआ था. पंडित जवाहर लाला नेहरू ने संविधान सभा के समक्ष "उदेश्य प्रस्ताव" 13 दिसंबर, 1946 को प्रस्तुत किया जो भारतीय संविधान की नींव थी. उदेश्य प्रस्ताव को संविधान के रूप में परिष्कृत (establishment) करने के लिए विभिन्न विषियों से सम्बंधित समितियों का गठन किया गया जिसमें सबसे प्रमुख डाक्टर भीम राव अम्बेडकर की प्रधिनिध्ता में बनी सात सदस्यों वाली प्रारूप कमेटी थी.

प्रारूप कमेटी में डाक्टर अम्बेडकर के अतिरिक्त एन गोपालस्वामी अयंगर, अल्लादि कृषणस्वामी अय्यर, के.एम मुंशी, मोहम्मद सदाउल्लाह डी पी खेदान(1948 में इनकी मृत्यु के पश्चात कृष्णमाचारी नियुक्त) अन्य सदस्य थे.

26 नवंबर, 1949 को संविधान अंगीकृत (adopt) किया गया था. जिसपर 284 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए उसके बाद 26 जनवरी, 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ. आपको अब अच्छे से पता चल गया होगा भारत का संविधान कब लागू हुआ लेकिन यह जानना भी जरुरी है कि भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को क्यों लागू हुआ?

भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को क्यों लागू हुआ? 


जैसा कि ऊपर बताया गया है कि भारत का संविधान 26 नवंबर, 1949 तक पूरी तरह त्यार हो चुका था और सभी समुदायों के प्रतिनिधियों ने इसपर अपने दस्तखत करके (सिख प्रतिनिधियों को छोड़कर) संविधान को adopt कर लिया था लेकिन इसको लागू नहीं किया. संविधान लागू करने का दिन 26 जनवरी, 1950 ही चुना गया. इसके पीछे कारण यह था कि साल 1930 से ही 26 जनवरी का दिन सम्पूर्ण भारत में स्वाधीनता दिवस के रूप में मनाया जाता था. इसलिए संविधान लागू करने का दिन 26 जनवरी निर्धारित किया गया.

भारतीय संविधान के निर्माण में कितना समय लगा? 


भारतीय संविधान का निर्माण करने वाली संविधान सभा का गठन जुलाई, 1946 में कैबिनेट मिशन की संस्तुतियों (recommendations) के आधार पर किया गया. भारतीय संविधान दुनिया के सभी देशों से बड़ा लिखित संविधान है. इसके निर्माण में दो साल,  ग्यारह महीने और 18 दिन का समय लगा.  इसमें आरम्भ में 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 18 अनुसूचियाँ (वर्तमान में 12) थी.

संविधान सभा की आख़िरी मीटिंग 24 जनवरी, 1950 को हुई और इसी बैठक में संविधान सभा के प्रतिनिधियों द्वारा डाक्टर राजेंद्र प्रसाद को भारत का राष्ट्रपति चुना गया जो भारत के पहले राष्ट्रपति के तौर पर जाने जाते है.

भारतीय संविधान के लेखक कौन है? 


अगर भारतीय संविधान के लेखक की बात की जाए तो कोई एक व्यक्ति विशेष इसका लेखक नहीं है. भारतीय संविधान का निर्माण भारतीय जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की संविधान सभा द्वारा किया गया था. तत्कालीन संविधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या 389 निर्धारित की गई थी जिसमें 292 ब्रिटिश प्रांतो से, 93 देशी रिसायतों से एवं 4 कमिश्नर क्षेत्रों दिल्ली, अजमेर-मेवाड़, कुर्ग एवं ब्रिटिश बलूचिस्तान के प्रतिनिधि शामिल थे.

हर प्रांत की सीटों को जनसंख्या ratio के आधार पर तीन प्रमुख समुदायों में बांटा गया. तीन मुख्य समुदाय जिनको संविधान सभा का सदस्य बनाया गया वो थे मुस्लिम, सिख और सामान्य. इनकी अनुपात जनसंख्या के आधार पर थी.

संविधान समिति 

संविधान समितियां जिनके अध्यक्षों का संविधान के निर्माण में योगदान था उनकी भूमिका इस प्रकार है

प्रारूप समिति:- इसके अध्यक्ष डाक्टर भीम राव अम्बेडकर थे जिन्होंने संविधान का फॉर्मेट अर्थात प्रारूप त्यार करने में अहम भूमिका निभाई.

कार्य संचालन:- इस समिति के अध्यक्ष के.एम मुंशी थे.

संघ संविधान, संघ शक्ति समिति की अध्यक्षता पंडित जवाहर लाल नेहरू ने की थी इसी प्रकार मूल अधिकार, अल्पसंख्यक, प्रान्तीय संविधान की अध्यक्षता सरदार वल्लभ भाई पटेल ने की. प्रक्रिया, वार्ता, झंडा समिति की डाक्टर राजेंद्र प्रसाद, अल्पसंख्यक उपसमिति की एच सी मुखर्जी, सदन समिति की पी. सीतारमैया और वित्त एवं कर्मचारी समिति की डाक्टर राजिंद्र प्रसाद ने अध्यक्षता की. इस प्रकार संविधान के निर्माण एवं इसको लागू करते समय कुल आठ समितियां बनाई गई थी. इन समितियों के अध्यक्षों का संविधान त्यार करने में अपना अपना योगदान है.

डाक्टर भीम राव अम्बेडकर को भारतीय संविधान के जनक के रूप में जाना जाता है क्योंकि संविधान का फॉर्मेट त्यार करने का श्रेय उन्हीं को जाता है.

भारत की संविधान सभा के अध्यक्ष कौन थे? 


डाक्टर सच्चिदानंद सिन्हा ने संविधान सभा के प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता की थी जो कि अस्थाई तौर पर इस पद पर नियुक्त किए गए थे. संविधान सभा का पहला अधिवेशन (first session) 9 दिसंबर, 1946 को संपन्न हुआ था.

उसके बाद 11 दिसंबर, 1946 को डाक्टर राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा का स्थाई अध्यक्ष तथा एस सी मुखर्जी को उप सभापति नियुक्त किया गया.

संविधान का निर्माण क्यों किया गया?


किसी भी देश के कुछ नियम और कायदे होते है जो उस देश के धर्म, विचारधारा, रहन-सहन और जलवायु को देखकर बनाए जाते है जिससे देश एक दिशा में प्रगति की और बढ़ता है. भारत पर सैंकड़ों वर्षों से बाहरी शक्तियां हकूमत करती आ रही थी और देश पर अपने नियमों के अनुसार कार्य कर रही थी.

15 अगस्त, 1947 से पहले भारत 200 वर्ष तक अंग्रेज़ों का गुलाम रहा जिसकी वजह से भारत में पूरी राज्य विवस्था अंग्रेज़ों द्वारा लागू किए गए संविधान के अनुसार ही चलती थी. अंग्रेज़ों द्वारा भारत छोड़ देने के बाद भारत के लिए जितनी महत्वपूर्ण आज़ादी थी उतना ही महत्वपूर्ण था कि देश का अपना एक संविधान हो जो भारत की राज्य विवस्था और नागरिकों को दिशा निर्देश प्रदान करे.

भारत शुरू से बड़ी आबादी वाला देश रहा है और इतनी बड़ी जनसंख्या को किसी दिशा में आगे बढ़ाने के लिए यह बहुत जरुरी था कि देश के पास अपने नियमों, कर्तव्यों और अधिकारों की नियमावली हो जिससे देश प्रगति की और अग्रसर हो बस इसी बात को देखते हुए भारत के संविधान का निर्माण किया गया. 

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