CAA kya hai - CAA क्या है

CAA क़ानून पूरे देश में विवाद का विषय बना हुआ है इसलिए हर किसी के लिए यह जानना जरुरी है कि CAA क्या है, CAA का full form क्या है, क़ानून को लेकर विवाद क्या है आदि. इस आर्टिकल में हम आपके इन सभी प्रश्नों का उत्तर देने वाले.

जब 1971 में बांग्लादेश आज़ाद हुआ तो वहां से लाखों की गिणती में लोग प्रवास करके भारत के दो राज्य असम और पश्चिम बंगाल में घुस आए जिनकी शनाख़्त करने के लिए सरकार ने एनआरसी करवाई जिसमें 19 लाख लोग अवैध नागरिक पाए गए. 19 लाख में से 3 लाख मुस्लिम और बाकी हिन्दू धर्म से सम्बंधित लोग थे. NRC क्या है उसके बारे में आप यहां पढ़ सकते है.

caa kya hai
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एनआरसी के बाद फिर असम में विवाद छिड़ गया क्योंकि लोगों का कहना था कि एनआरसी में उन लोगों को भी अवैध नागरिक घोषित कर दिया गया है जो किसी कारण अपने documents नहीं दिखा पाए लेकिन वो असल में भारत के नागरिक है और शुरू से यहां रहते आ रहे है. उन्हीं लोगों को नागरिकता देने के लिए ही नागरिकता क़ानून में बदलाव किया गया जिसको CAA यानि citizenship amendment act कहा जाता है. चलिए अब समझते है कि CAA क्या है?

CAA क्या है 


CAA एक क़ानून है जो भारत सरकार द्वारा लागू किया गया है जिसके अनुसार पड़ोसी देशों जैसे कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक रूप से प्रताड़ित होकर भारत में अवैध ढंग से रह रहे लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान रखा गया है. इस एक्ट के मुताबिक नागरिकता उन्हीं को मिलेगी जिनकी आबादी पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यक है. अल्पसंख्यकों की श्रेणी में हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी आते है.

Amendment क्या है 

जब भी किसी पुराने क़ानून में कोई बदलाव या सुधार किया जाता है उस प्रक्रिया को अंग्रेजी में amendment कहते है इसलिए जब कभी भी आप amendment शब्द सुने तो समझ लें कि किसी पुराने क़ानून में कोई ना कोई बदलाव किया गया है. इसलिए नागरिकता संशोधन क़ानून के साथ amendment शब्द जोड़ा गया है.

नागरिकता क़ानून 1955 क्या है? 

नागरिकता क़ानून 1955 पुराना नागरिकता क़ानून है जिसमें शोध करके नया क़ानून CAA बनाया गया है. पुराने नागरिकता क़ानून के मुताबिक अवैध नागरिक पाए जाने वाले लोगों को कम से कम 11 साल तक भारत में रहना पड़ता था फिर जाकर उनको नागरिकता मिलती थी जिसको घटाकर अब 6 साल कर दिया गया है.

पुराने क़ानून के मुताबिक अगर किसी का जन्म भारत में हुआ है या उसके माता पिता में से कोई एक या दोनों भारतीय नागरिक है तो उस व्यक्ति को भी नागरिकता मिल जाती थी लेकिन अब CAA के तहत नागरिकता केवल उसी व्यक्ति को मिलेगी जो साबित करेगा कि वो या उसके माता 1950 से भारत में रह रहे है.

क्या है नागरिकता संशोधन एक्ट 2019? 


CAA यानि नागरिकता संशोधन क़ानून 2019 को अगर आसान भाषा में समझा जाए तो कहा जा सकता है कि पड़ोसी देशों से धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होकर भारत आए गैर-मुस्लिम लोगों को नागरिकता देने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए पुराने क़ानून में जो बदलाव किए गए है उसी को नागरिकता संशोधन एक्ट 2019 का नाम दिया गया है. गैर-मुस्लिम जिनको नागरिकता दी जाएगी उनमें पड़ोसी देशों की अल्पसंख्यक आबादी को शामिल किया गया है जिनमें सिख, जैन, हिन्दू, बौद्ध, ईसाई और पारसी आते है.

लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि इसमें से मुसलमानों और नास्तिकों (Atheists) को बाहर रखा गया है कहने का मतलब कि इस श्रेणी के लोगों को जो बिना सरकारी मंज़ूरी के भारत में रह रहे है उनको नागरिकता नहीं दी जाएगी. अब आपको समझ आ गया होगा कि CAA kya hai. आगे हम जानेंगे अवैध प्रवासी कौन है और उनके लिए क्या प्रावधान है?

कौन है अवैध प्रवासी? 


सरकार द्वारा लागू किए गए नए क़ानून CAA के मुताबिक जो लोग बिना वीज़ा के भारत में रह रहे है या जिनके वीज़ा की समय सीमा समाप्त हो चुकी है उनको अवैध प्रवासी माना जाएगा.

अवैध नागरिक यदि हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन या ईसाई धर्म से सम्बंधित पाया जाता है तो उसको तुरंत नागरिकता प्रदान कर दी जाएगी इसके लिए शर्त यह है कि वो भारत में 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत में रह रहा हो. अगर वो 31 दिसंबर, 2014 के बाद आया है तो भी उसको नागरिकता दे दी जाएगी लेकिन उसको कम से कम 6 साल तक भारत में रहना होगा लेकिन जैसा कि हम पहले बता चुके है कि वो मुस्लमान या नास्तिक (athiest) नहीं होना चाहिए.

अवैध प्रवासियों के लिए क्या प्रावधान है? 


CAA लागू होने के बाद अब अवैध नागरिकों की पहचान करने के लिए पूरे देश में एनआरसी करवाई जाएगी जिसमें लोगों को सरकार द्वारा निर्धारित किए गए दस्तावेज़(documents) दिखाकर अपनी नागरिकता सिद्ध करनी होगी.

जो लोग अपनी नागरिकता साबित करने में सफल नहीं होंगे उनको अवैध नागरिक घोषित कर दिया जाएगा. जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है कि नागरिकता साबित करने के लिए आपको यह सिद्ध करना होगा कि आप या आपके पूर्वज 1950 के पहले से भारत में रहते आ रहे है.

अगर कोई गैर-मुस्लिम अवैध नागरिक पाया जाता है तो उसको तुरंत नागरिकता प्रदान कर दी जाएगी लेकिन अगर अवैध नागरिक पाया जाने वाला व्यक्ति मुस्लमान होगा तो उसको नागरिकता नहीं मिलेगी.

पुष्टि होने के बाद उनको पहले detention center या जेल भेजा जाएगा जहाँ उसको कोर्ट में अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कुछ समय मिलेगा. अगर वहां भी नागरिकता सिद्ध करने में असफल होता है तो उसको अपने देश वापिस भेजा जाएगा जहाँ से वो आया है.

CAB क्या है 


जब भी कोई नया क़ानून बनता है तो उसको सरकार द्वारा एक प्रस्ताव या बिल के रूप में संसद में पेश किया जाता है जबतक उसको विधान सभा और राज्य सभा से मंजूरी नहीं मिल जाती वो एक बिल ही रहता है लेकिन जब वो बिल सरकार द्वारा विधान सभा और राज्य सभा से पारित करवाकर राष्ट्रपति से मंजूरी ले ली जाती है तो वो एक एक्ट यानि क़ानून बन जाता है.

CAB 11 दिसंबर, 2019 को राज्य सभा में पास हुआ. इसके पक्ष में 125 और विरोध में 105 वोट पड़े जिसके बाद इसको राष्ट्रपति के पास मंज़ूरी के लिए भेज दिया गया. ग्रह मंत्री अमित शाह ने यह बिल 9 दिसंबर को विधान सभा में पेश किया था. विधान सभा में इस बिल के पक्ष में 311 और विरोध में केवल 80 वोट पड़े थे जिसके बाद इसको राज्य सभा में 11 दिसंबर को पास करवाया गया.

CAB को अब विधान सभा, राज्य सभा और राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिल चुकी है इसलिए अब यह बिल क़ानून बन चुका है जिसको CAA कहा जाता है. अब CAB और CAA में कोई अंतर नहीं है. CAB को मंज़ूरी मिलने के बाद CAA का रूप दिया गया है.

विधेयक का क्या हुआ 


नागरिकता संशोधन विधेयक को क़ानून बनाने के लिए बीजेपी सरकार ने जनवरी, 2019 को भी यह बिल विधान सभा में पेश किया था. 8 जनवरी, 2019 को विधान सभा में यह बिल पास हो गया था लेकिन 16वीं लोक सभा का कार्यकाल ख़तम होने की वज़ह से यह बिल क़ानून नहीं बन पाया क्योंकि किसी भी बिल को क़ानून में तबदील करने के लिए उसको विधान सभा के बाद राज्य सभा में भी पास करवाना पड़ता है जिसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी लेना अंतिम प्रिक्रिया होती है.

फिर दोनों सदनों से पास कराने की जरुरत क्यों? 


जैसे कि हम सभी को पता है कि भारत में सरकार चौन प्रणाली के तहत चुनी जाती है अर्थात भारत में सरकार लोकतान्त्रिक ढंग के बनती है इसलिए सरकार जब भी कोई नया क़ानून बनाती है या पुराने क़ानून में कोई बदलाव करती है तो इसके लिए सरकार को लोगों द्वारा चुने गए प्रधिनिधियों से सहमति लेनी पड़ती है.

सहमति लेने के लिए विधान सभा और राज्य सभा दोनों सदनों के प्रतिनिधियों द्वारा सरकार के किसी प्रस्ताव के हक या विरोध में वोट डाली जाती है. उन votes की गिणती के आधार पर ही कोई नया बिल पास या खारिज़ होता है. ऊपर हम बता चुके है कि CAB के हक में अधिक वोटिंग होने के कारण अब यह क़ानून बन चुका है.

कैब का फुल फॉर्म क्या है?


CAB का फुल फॉर्म है Citizenship amendment bill जिसको हिंदी में नागरिकता संशोधन विधेयक कहा जाता है. यह बिल सरकार द्वारा संसद में पेश किया गया था जिसको मंज़ूरी मिलने के बाद अब यह एक्ट बन चुका है. CAB अब CAA के नाम से जाना जाता है.

क़ानून को लेकर विवाद क्या है? 


CAA क़ानून लागू होने के बाद पूरे देश में इसको लेकर विवाद चल रहा है. मुस्लमान समुदाय का कहना है कि CAA क़ानून लागू होने के बाद उनकी नागरिकता छीन ली जाएगी क्योंकि इस क़ानून तहत यदि मुस्लमान अवैध नागरिक घोषित हो जाता है तो उसको इस क़ानून में नागरिकता देने का नियम नहीं बनाया गया है जबकि बाकी धर्म के लोगों को दस्तावेज़ ना होने पर भी नागरिकता देने का प्रावधान रखा गया है.

हालांकि इसपर सरकार ने बयान जारी करते हुए कहा है कि पड़ोसी देशों (पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश) में अल्पसंखयक लोग धार्मिक शोषण का शिकार होते है क्योंकि वो देश सांविधानिक तौर पर खुद को इस्लामिक देश घोषित कर चुके है. इसलिए उन देशों में रह रही अल्पसंख्यक आबादी को सुरक्षा देने के लिए यह क़ानून बनाया गया है. इससे भारत के मुसलमानों को कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

सरकार का यह भी कहना है कि पड़ोसी देशों में मुसलमानों की गिणती बहुसंख्यक है इसलिए उनको इस क़ानून में नागरिकता देने का प्रावधान नहीं है क्योंकि वो अपने देश में सुरक्षित है और उनपर धार्मिक शोषण होने का सवाल ही नहीं उठता.

क्या CAA का भारत के मुसलमानों पर फर्क पड़ेगा? 


सबसे महत्वपूर्ण बात जिसको लेकर विवाद बना हुआ है वो यह है कि अगर भारत के मुस्लमान एनआरसी में डॉक्यूमेंटस के आभाव के कारण यह सिद्ध ना कर पाए कि वो या उनके पूर्वज 1950 से भारत में ही रहते आ रहे है तो उनका क्या होगा क्योंकि CAA क़ानून के मुताबिक यदि कोई मुस्लमान अवैध नागरिक पाया जाता है तो उसको नागरिकता नहीं दी जाएगी.

ऐसे में खदशा जताया जा रहा है कि या तो उनको लंबे समय तक detention centers में रखा जाएगा या फिर देश से निकाल दिया जाएगा. CAA क़ानून को लेकर अभी भी यह विवाद बना हुआ है जिसको लेकर मुस्लमान समुदाय चिंतित है.

CAA को लेकर क्यों प्रदर्शन हो रहे है 


CAA क़ानून लागू होने के बाद जहाँ एक तरफ इसके विरोध में प्रदर्शन हो रहे है वहीं इसके समर्थन में भी प्रदर्शन देखने को मिल रहे है. विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों का मानना है कि CAA यानि नागरिकता संशोधन एक्ट सविधान की धर्मनिरपेक्ष मूल भावना पर बहुत बड़ा हमला है क्योंकि इसमें धर्म को आधार बनाकर लोगों को आपस में बाँट कर समाज़ में नफ़रत का माहौल पैदा किया जा रहा है.

इसके एलावा मुसलमानों का मानना है कि नागरिकता संशोधन क़ानून उनकी नागरिकता छीनने के लिए बनाया गया है इसलिए CAA क़ानून को लेकर जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे है.

सविधान का आर्टिकल 14 और 15 क्या है? 

विरोध प्रदर्शन करने वालों का कहना है कि CAA यानि नागरिकता संशोधन क़ानून भारत के सविधान के खिलाफ़ है क्योंकि भारत का सविधान समानता का अधिकार देता है जबकि CAA क़ानून लागू होने के बाद भारत के व्यक्ति को धर्म के आधार पर नागरिकता दी जाएगी जिससे धार्मिक भेद भाव बढेगा.

आर्टिकल 14 

सविधान के आर्टिकल 14 के अनुसार प्रत्येक भारतीय को क़ानून के समक्ष संरक्षण और समानता का अधिकार दिया गया है अर्थात क़ानून भारत के हर नागरिक को बिना उसका धर्म देखे बराबरी का अधिकार देता है. क़ानूनी प्रणाली में व्यक्ति का धर्म देखकर उसके साथ अलग-अलग बर्ताव नहीं किया जाता.

आर्टिकल 15 

सविधान के आर्टिकल 15 के अनुसार किसी भी व्यक्ति जो भारतीय है उसके साथ उसकी जाति, धर्म, मूलवंश, लिंग, जन्मस्थान आदि के आधार पर भेद भाव करने पर निषेध है.

अब आर्टिकल 14 और 15 से आप खुद अपनी राए बना सकते है कि क्या नया क़ानून CAA यानि citizenship amendment act सविधान विरोधी है या क्या इससे लोगों के साथ धार्मिक भेद-भाव होगा.

पूर्वोत्तर के लोगों का क्या रुख है


नए क़ानून citizenship amendment act को लेकर पूर्वोत्तर के लोगों की अलग-अलग राए देखने को मिल रही है. पूर्वोत्तर के लोगों का कहना है कि अगर एनआरसी पूरे देश में लागू की जाती है तो इससे देश में आर्थिक संकट पैदा हो सकता है क्योंकि असम में जब एनआरसी करवाई गई थी तो वहां 16000 करोड़ रुपए का खर्च आया था जिसका लोगों पर आर्थिक प्रभाव देखने को मिल रहा है.

वहीं कुछ लोगों का कहना है कि प्रवासियों की वजह से भारत के असल नागरिक रोज़गार से वंचित रह रहे है इसलिए अवैध प्रवासियों को अपने देश वापिस भेजा जाना चाहिए वहीं पूर्वोत्तर के कुछ लोग CAA को केवल मुस्लमान विरोधी मानते है.

CAA NRC का मतलब क्या है 


जैसा कि हम आपको पहले ही बता चुके है कि CAA यानि citizenship amendment act पुराने नागरिकता क़ानून 1855 में शोध करके पड़ोसी देशों से धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होकर भारत में रह रहे हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय को नागरिकता देने के लिए बनाया गया है जिसमें नागरिकता प्रदान करने के लिए शर्तों में ढील की गई है वहीँ NRC एक क़ानूनी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से सरकार अवैध नागरिकों का पता लगाती है. NRC के बारे में यहाँ पढ़े।

सम्बंधित पोस्ट:- NRC क्या है 

निष्कर्ष 


इस आर्टिकल में हमने आपको CAA के बारे में डिटेल में जानकारी प्रदान करने की कोशिश की है जैसे कि CAA क्या है, CAA का फुल फॉर्म क्या है, CAA को लेकर प्रदर्शन क्यों हो रहे है, आदि. हमने इस आर्टिकल के माध्यम से केवल सूचना प्रदान करने का प्रयास किया है जिसके आधार पर आप अपनी राए बना सकते है. हम भारत में रहने वाले हर समुदाय का सम्मान करते है. आशा करते है आपको इस पोस्ट के माध्यम से समझ आ गया होगा कि CAA क्या है.

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