DTP kya hai- DTP ka full form in Hindi

क्या आपको जानकारी है कि DTP क्या है, इसकी full form, उपयोग और विशेषता क्या है यदि नहीं तो इस आर्टिकल में आपको सभी प्रश्नों के उत्तर मिलने वाले है. इस पोस्ट में आपको DTP की Advantages, विशेषता और यह कितने प्रकार की होती है सब के बारे में पता चलेगा। चलिए अब हम समझते हैं कि DTP क्या है?


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DTP kya hai-DTP क्या है


DTP इन तीन अक्षरों को अगर तोड़ा जाए तो Desktop Publishing बनता है जिसका मतलब है desktop यानि मेज़ पर प्रकाशन का काम करना. इसको हम थोड़ा और डिटेल में समझने की कोशिश करते है कि desktop यानि मेज पर प्रकाशन करने का क्या मतलब है और desktop पर प्रकाशन कैसे किया जाता है?

Desktop पर publishing का काम करने के लिए जिन उपकरणों की जरुरत होती है उनमें मुख्य रूप से आते है

1. Computer 

2. Scanner

3. Printer 

1. Computer:- Computer से क्या काम किए जाते है उनके बारे में आपको पता ही होगा. Desktop publishing करने के लिए जिस उपकरण की सबसे पहले जरुरत पड़ती है वो है computer. Desktop publishing करने के लिए computer के माध्यम से commands दी जाती है.

2. Scanner:- Computer के बाद आता है स्कैनर जिसका उपयोग hard copy image को soft copy image में बदलने के लिए किया जाता है अर्थात स्कैनर किसी भी प्रकार की image को उस format में convert कर देता है जिसको computer समझ सके और computer में उसका किसी भी तरीके से इस्तेमाल किया जा सके.

Printer:- तीसरा उपकरण जो प्रकाशन का काम करने के लिए जरुरी है वो है प्रिंटर. प्रिंटर all in one भी हो सकता है मतलब ऐसा प्रिंटर जिसके माध्यम से documents को scan, print और उनकी photocopy भी निकली जा सके. इसके एलावा simple printer का उपयोग भी किया जा सकता है. Simple printer वो होता है जिसके माध्यम से computer में त्यार की गई सामग्री का केवल print निकाला जा सकता है कहने का तात्पर्य है कि केवल output ली जा सकती है लेकिन computer में कोई input नहीं डाली जा सकती.

इन तीनों उपकरणों को जब एक मेज़ अर्थात desktop या table पर रखकर प्रकाशन का काम किया जाए तो उसे desktop publishing कहा जाता है. अब आपको पता चल गया होगा DTP क्या है? आगे हम DTP की full form, DTP softwares और इसके उपयोग के बारे में बात करेंगे।

DTP ka full form 


DTP का full form होता है desktop publishing. जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है कि computer और अन्य उपकरणों जैसे कि स्कैनर और प्रिंटर आदि को जब desktop यानि मेज़ या टेबल पर रखकर जब प्रकाशन का काम किया जाता है उसे desktop publishing कहा जाता है. DTP क्या है के इस उल्लेख में अब हम DTP softwares के बारे में बात करते है.

Dtp software in Hindi 


प्रकाशन का कार्य करने के लिए हमें computer में जिन softwares की जरुरत पड़ती है उन्हें DTP programs कहा जाता है. DTP के लिए मुख्य रूप से पेज़ मेकर, क्वार्क एक्सप्रेस, कोरल ड्रा, वेंचुरा पब्लिशर, माइक्रोसॉफ्ट पब्लिशर, adobe photoshop आदि जैसे programs की जरुरत पड़ती है. इनके बारे में हम संक्षेप में जानते है.

 पेज़ मेकर (page maker)

एल्डस नाम की कंपनी शुरू से ही desktop publishing के क्षेत्र में आगे रही है. बड़े पैमाने पर किए जाने वाले कामों में एल्डस page maker बहुत ही फायदेमंद साबित हुआ है. एल्डस का यह page maker point and click विधि पर काम करता है.यह आईबीऍम और माइक्रोसॉफ्ट विंडो और मैकिंटोश के लिए उपलब्ध है. विंडो और मैकिंटोश सिस्टम की सहायता से कई तरह के menu प्रयोग में ले आता है जिससे इसको operate करना आसान हो जाता है.

क्वार्क एक्सप्रेस 

क्वार्क कंपनी ने एक high-end publishing program त्यार किया था जिसका बड़े व्यापारिक कामों में उपयोग हो रहा है और काफ़ी ज्यादा लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण यह है कि सीखने और प्रयोग करने में यह बहुत आसान है. क्वार्क एक्सप्रेस को मैकिंटोश और आईबीएम पर use करने के लिए dance and window यानि disk operating सिस्टम है जो आईबीऍम और दूसरे personal computers में एक लोकप्रिय सॉफ्टवेयर के तौर पर होता है.

Point and click वाले program से एक ही समय पर अलग अलग तरह की windows खोली जा सकती है और एक ही समय पर आप सभी पर काम कर सकते हो. क्वार्क एक्सप्रेस में शब्द, lines और scales ठीक करने का सामर्थ्य होता है. इसमें आप स्केल और ग्राफ़िक को किसी भी तरह घुमा सकते हो. इसमें font color seperation की योग्ग्य्ता भी है.

कोरल ड्रा 

इस प्रोग्राम इस्तेमाल रंगीन DTP यानि Desktop Publishing के लिए किया जाता है. इसकी विशेषता यह है कि इसमें line work बहुत ही अच्छे तरीके से होता है. इसके साथ आने वाले सहायक सॉफ्टवेयर फोटोपेंट में image processing करके कोरल ड्रा में graphics का use किया जाता है. आजकल इसके नए नए संस्करणों का उपयोग किया जाता है और इसमें फोटो का mode बदलने की सुविधाएं मिलती है. इसके एलावा बहुत सारे खास प्रभाव inbuilt होते है जिनको आप drawing पर use कर सकते हो. यह रंगीन DTP का सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला सॉफ्टवेयर है.

वेंचुरा पब्लिशर 

वेंचुरा सॉफ्टवेयर का desktop publisher भी एक high-end प्रोग्राम है. यह क्वार्क एक्सप्रेस और एल्डस pagemaker से अलग है. इसका कारण यह है कि यह प्रोग्राम frame based है. इससे frames के साथ layout को set किया जाता है उसके बाद objects आते है. वेंचुरा पब्लिशर दूसरा सबसे बड़ा Desktop Publisher प्रोग्राम है. Technical documentation के लिए इसे ज्यादा सही माना जाता है.

माइक्रोसॉफ्ट पब्लिशर 

Microsoft corporation का यह low-end प्रोग्राम है. इसको आईबीएम या किसी भी साधारण personal computer पर use किया जा सकता है. व्यापारिक कामों के लिए यह इतना आसान प्रोग्राम है कि इसमें आप खुद सारे काम बड़ी आसानी से कर सकते हो हालांकि यह point and click oriented है जिसमें objects के चारों तरफ frames होते है और इनको आसानी से चलाया जा सकता है.

इसमें document त्यार करने के तीन पड़ाव है - खाली पेज़, पेज़ विज़ार्ड और टेम्पलेट. खाली पेज़ वाले option में आपको ही खुद ही सारा पेज़ डिज़ाइन करना पड़ता है. Page wizard newsletter, calander, business form, invitation card आदि आपकी इच्छा के अनुसार document त्यार करता है. जबकि टेम्पलेट में प्रकाशन/सामग्री में आवश्यकता के अनुसार सैकड़ों किस्म की arts का use करके उसमें सुधार किया जाता है.

फोटोशॉप 

Graphics में सबसे अधिक use किया जाने वाला यह सॉफ्टवेयर अब रंगीन desktop publishing का एक विशेष अंग बन चुका है. इसमें image processing का काम बहुत अच्छे तरीके से होता है. इसकी निर्माता कंपनी का नाम adobe corporation है. आप इसमें फोटो edit करके उसको कोरल ड्रा, पेजमेकर और क्वार्क एक्सप्रेस में उसका उपयोग कर सकते हो.

यहाँ तक आपको ज्ञात हो गया कि DTP क्या है,इसका full form और डीटीपी में किन सॉफ्टवर्स की जरुरत पड़ती है आगे हम importance and advantages of DTP के बारे में बात करने वाले है.

Importance and advantages of DTP in Hindi 


कई DTP प्रोग्राम ऐसे है जिनसे आप अलग अलग word processing programs पर किए गए कामों को एक ही स्थान पर कर सकते हो. इसी तरह DTP यानि Desktop publishing में तीन इस तरह के बेसिक्स होते है जो इसको word processing प्रोग्राम से अलग करते है. इनमें पहला अंतर graphics का है. ज्यादातर DTP programs में आप graphics या images को सीधा screen पर बनाकर उनको अपने text में शामिल कर सकते हो या दूसरे programs में भी इसको लेके जाया जा सकता है.

आप पेंट या ड्रा की मदद से भी सीधा screen पर images बना सकते हो. यह दोनों प्रोग्राम mouse की मदद से ही चलते है. लेकिन पेंट प्रोग्राम में आप बिंदुओं के संग्रह का उपयोग कर सकते हो. Draw प्रोग्राम में lines और वक्र रेखाओं को मिलाकर screen पर image त्यार की जाती है. कुछ DTP प्रोग्राम ऐसे होते है जिनमें पेंटिंग और drawing दोनों तरह की सुविधाएं होती है.

ज्यादातर DTP Programs में क्लिप art का भी एक छोटा सा संग्रह होता है. Clipart graphic images का एक ऐसा संकलन है जिसको आप आवशक्यता अनुसार अपने text में use कर सकते हो. इसके एलावा कई clipart सॉफ्टवेयर भी आते है जिनको आप खरीद सकते हो.

किसी image की फोटो बनाने के लिए आप स्कैनर का इस्तेमाल कर सकते हो. स्कैनर में hardware device है जो फोटो का कॉपी की image त्यार करके उसको उस भाषा में तबदील कर देता है जिसको आपका computer समझ सकता है. DTP programs में एक और महत्त्वपूर्ण हिस्सा है जिसको टाइपोग्राफ़िकल कण्ट्रोल (Typographical control) कहा जाता है. इसके साथ आप अपनी इच्छा अनुसार पेज layout डिज़ाइन कर सकते हो.कुछ word processing programs इस तरह के है जिनमें typographical control एक निश्चित सीमा तक नहीं होता जबकि DTP programs में ऐसा नहीं है.

तीसरा अंतर columns के संग्रह को लेकर है. Word processor programs की बजाए DTP Programs में यह सुविधा काफ़ी अच्छी और ज्यादा है क्यूंकि सभी users के लिए DTP Programs का प्रयोग एक जैसा नहीं होता. इसलिए इसमें कई तरह के और programs है जिनको आप use कर सकते हो.

90% लोगों को बहुत ही आसान programs की जरुरत होती है जिससे वो सादा पोस्टर, newsletter आदि बना सके. आम लोगों को इतने ज्यादा advance programs की आवश्क्यता नहीं होती जितनी प्रकाशकों को होती है जबकि इस तरह के लोगों को lay-end DTP Programs की जरुरत होती है जिनपर कम कीमत में बेहतर गुणवत्ता वाला काम निकल सके. बाकी 10% ऐसे बड़े व्यापारिक अदारे है जिनको high-end DTP Programs की जरुरत पड़ती है. इनमें बहुत सारी पत्रिकाएं, उत्पादों के बड़े बड़े catalogue और मोटी मोटी किताबों का काम किया जाता है.

Dtp ke upyog 


लेखक, प्रकाशक और संपादक DTP program की सहायता से किताबें, मगज़ीन और रोज़ाना के अख़बार छाप सकते है. विज्ञापन कंपनियों में तो बिना DTP का इस्तेमाल किए काम ही नहीं चल सकता. विज्ञान की सामग्री और graphics, photos आदि सारा प्रकाशन आदि DTP program की सहायता से ही संभव है. शिक्षा के क्षेत्र में भी यह बहुत उपयोगी है. Classes में शिक्षादायक सूचनाएं DTP का use करके दी जा सकती है. DTP से आप घर बैठे ही छोटे मोटे काम शुरू कर सकते हो जैसे ग्राहकों के लिए visiting card, letterhead, biodata आदि बनाना. 

DTP program पेज़ पर काम करने के लिए आपको बहुत सारे तरीके प्रदान करता है मतलब आप अपनी इच्छा और जरुरत के अनुसार जिस तरह चाहो वैसे कर सकते हो. DTP program की सहायता से आप अक्षरों, शब्दों या lines में आई गड़बड़ को ठीक कर सकते हो. पेज़ पर आप अपनी जरुरत के हिसाब से text जमा कर सकते हो इनको इस तरह इकठ्ठा किया जा सकता है कि कम से कम जगह में अधिक से अधिक सूचना आ जाए. सजावट की दृष्टि से अगर text फैलाना हो तो यह भी हो सकता है. 

ज्यादातर प्रोग्राम ऐसे होते है जिनकी सहायता से आप graphics के चारों तरफ या graphics के हिसाब से text को इकठ्ठा कर सकते हो. अच्छे layout के लिए box बनाया जा सकता है. 

DTP प्रोग्राम text और graphics से सम्बंधित है. Headline और matter आदि सभी इसके अंग है. इसी तरह कला या  graphics का हर हिस्सा इसी का part है. इसलिए जब आप पेज़ पर इन सभी को आपस में मिलाते हो आप देखोगे computer screen पर आपको यह एक जैसा ही नज़र आएगा.ज्यादातर desktop publishing program एक तरह का विज़ी विंग mode काम में लाते है. इसका अर्थ यह है कि screen पर आप जैसा पेज़ देख रहे हो ठीक वैसा ही प्रिंट कागज़ पर print होकर बाहर आएगा. आप जैसा print चाहते हो ठीक वैसा layout screen के ऊपर बना सकते हो. 

Types of DTP in Hindi



DTP Program में साधारणता तीन किस्म की विधियों का उपयोग में लाई जाती है-

1. Bench Processing

2. Frame-based

3. Point and click

1. Bench Processing:- बेंच प्रोसेसिंग (Bench processing), फ्रेम बेस्ड (frame based) और पॉइंट एंड क्लिक (Point and click).Bench processing विधि शुरू में प्रयोग की जाती थी. यह केवल उस काम के लिए अच्छी थी जिसमें layout कम हो. इसका कारण यह है कि bench processing सुरक्षित commands के निर्देशों पर ही चलती है और user का इसमें दखल नहीं होता. संक्षेप में कहा जा सकता है कि user पेज़ के हिस्सों का निर्माण करता है फिर programs, commands की मदद से पूरे पेज़ का layout डिज़ाइन त्यार करता है. 

2. Frame based:- दूसरी विधि frame based है जो अधिक लोकप्रिय है. Frame based programs में आप असली हिस्सों के साथ काम नहीं करते. इसमें आप सभी objects की frame out lines के साथ काम करते हो. इसमें आप हर object के लिए अस्थाई frame बनाते हो जिसको DTP Program में एक element के तौर पर माना गया है. इसके बाद आप इन frames को अपनी इच्छा अनुसार पेज का layout बनाने के लिए कहीं भी सरका सकते हो. इस विधि का लाभ यह है कि layout में आप box जैसे element का use कर सकते हो. 

3. Point and click:- तीसरी विधि point and click वाली है. यह लोकप्रिय इसलिए है क्यूंकि इसमें user elements को screen पर ही इधर उधर करके काम कर सकता है. आप जहाँ भी कोई बदलाव करना चाहते है उस point पर चले जाओ और mouse के साथ screen पर computer functions या संकेतों का चित्र या प्रतीक है. इस तरह menu command screen पर user के लिए उपलब्ध command की सूची होती है. 

History of DTP in Hindi


Computer की दुनिया में desktop publishing का काम 1980 दशक के मध्य में आरम्भ हुआ था. पॉल ब्रैन्डस ने सबसे पहले ऐल्डस पब्लिशिंग प्रोग्राम त्यार किया था जिसको एल्डस पेजमेकर कहा जाता है. यह प्रोग्राम apple computer कंपनी के मैकिंटोश computer के लिए बनाया गया था. इस DTP के आने से समय और पैसे की काफ़ी बचत हुई और उत्पाधकों में भी बहुत जल्दी बढ़ोतरी हुई, ना केवल बड़े बड़े उद्योग क्षेत्र में इसका उपयोग हुआ बल्कि लोग घरों में भी इसका इस्तेमाल करने लगे और प्रकाशन से सम्बंधित छोटे कामों को निपटाने लगे. 

जब लेज़र रइटर प्रिंटर आया जो एक ग्राफ़िक oriented प्रिंटर था उसकी DTP में पब्लिशिंग में बहुत महत्त्वपूर्ण जगह स्थापित हुई. इस ग्राफ़िक प्रिंटर ने एक नई प्रिंटर भाषा की शुरुआत की जिसको post script कहा जाता है. यह पेज़ printing devices के लिए एक सॉफ्टवेयर भाषा है जो सभी printers पर सभी computers के साथ प्रयोग की जा सकती है. आज लोगों के पास अच्छी गुणवत्ता के साथ प्रकाशन का काम करने के लिए अच्छे से अच्छे desktop publishing प्रोग्राम और प्रिंटर हैं. 

Desktop Publishing आने के बाद प्रकाशन के कारोबार में ज़बरदस्त क्रांति आ गई. Publishing software आने से पहले स्थिति बहुत ही मुश्किल थी. परकशकों के पास काम तो बहुत ज्यादा होता था लेकिन तकनीकी सुविधाओं की कमी के चलते इसे करने में बहुत समय लगता था. अगर आपको कोई छोटी सी रिपोर्ट या ऐसे ही कोई दूसरा दस्तावेज़ त्यार करना होता था तो पहले उस सामग्री को typewriter के ऊपर type करना पड़ता था फिर इसको शापाख़ाने में दिया जाता था अगर कोई छोटा काम हो तो उसको काट काट कर चिपकाया जाता था. 

इस तरह छोटे-छोटे कामों में भी बहुत अधिक समय लग जाता था और काम में निखार भी नहीं आता था. अगर कोई बड़ा और मुश्किल दस्तावेज़ जैसे कि विज्ञापन के पन्ने या कोई किताब आदि होती तो उसकी छपाई के लिए पहले एक typesetter की जरुरत पड़ती फिर आर्टिस्ट का काम शुरू होता, इसके बाद डिज़ाइनर पेज layout बनाता जिसमें उसको matter काट काट कर पेज़ पेस्ट करने पड़ते और फिर जाकर वो समाग्री अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँचती थी लेकिन Desktop publishing ने इस सारी प्रक्रिया को आसान बना दिया है. आज बहुत सारे काम थोड़े समय में आपकी computer screen पर ही निपट जाते है. 

Conclusion


अब आपको पूरी जानकारी मिल गई होगी कि DTP क्या है? अब हम DTP के लिए आपकी जरूरतों पर संक्षेप में बात करते है. Desktop publishing programs का उपयोग ज्यादातर लोग व्यापरिक पत्र, साधारण पत्र, बैनर, पोस्टर, greeting cards और कभी कभी newsletter और कभी कभी files त्यार करने के लिए करते है. इसलिए आप पहले निश्चित कर लें कि आपने किस किस्म का documents त्यार करने है. फिर आप उस हिसाब से देख सकते हैं कि आपके लिए word processor का इस्तेमाल सही रहेगा या desktop publishing का. यह आपकी जरुरत पर निर्भर करता है. Text बनाना, कॉलम बनाना जैसे छोटे मोटे काम तो word processor की मदद से भी हो जाते है. 

अगर आप DTP का प्रयोग करते हो तो documents में graphics लगाने का काम और भी आसान हो जाता है और आप उन्हें वही लगा सकते है जहाँ आप लगाना चाहते है. Word processor भी हालांकि ऐसे ही है लेकिन मुश्किल तब आती है जब document काफ़ी लंबा हो और उसको एक पेज़ से उठाकर दूसरे पेज़ पर ले जाने की जरुरत हो. Desktop publishing के softwares में preview की सुविधा होती है जिसमें आपको प्रिंट में ठीक वैसा ही document मिलेगा जैसा आपने screen पर देखा. 

DTP के लिए आपको पेंटियम प्रोसेसर वाले ऐसे कंप्यूटर की जरूरत है जिसकी 256 megabyte RAM, 40 गीगाबाइट हार्ड डिस्क और 32 megabytes का graphics कार्ड लगा हो.इसके एलावा computer में मल्टिमीडिआ किट लगी हो. Input उपकरणों में अगर आप स्कैनर और कैमरा का use करते हो तो desktop publishing और भी अच्छे तरीके से की जा सकती है. Output के लिए एक लेज़र प्रिंटर और रंगीन इंजेक्ट प्रिंटर होना चाहिए. बिजली की कमी में काम करते समय UPS का इस्तेमाल जरूर किया जाना चाहिए. अगर output को किसी service ब्यूरो के पास भेजना हो तो सीडी राइटर, zip drive या पैन ड्राइव का उपयोग किया जाना चाहिए. इस तरह आप समझ गए होंगे कि desktop publishing में आपको कौनसे सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर की जरुरत पड़ती है. 

यह थी DTP के बारे में पूरी जानकारी। हमें उम्मीद है आपको आपके सरे सवालों का जवाब मिल गया होगा जैसे कि DTP क्या है, इसकी फुल फॉर्म,उपयोग ,इतहास, इसके प्रकार एवं उपयोग क्या है. हम आशा करते हैं कि DTP क्या है का यह उल्लेख आपको पसंद आया होगा।

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