HIV का फुल फॉर्म - HIV ka full form

HIV का फुल फॉर्म, ज्यादातर लोग HIV और AIDS को एक ही बीमारी समझते है लेकिन ऐसा नहीं है. इस आर्टिकल के माध्यम से आप दोनों में क्या अंतर है अच्छी तरह समझ जाएंगे तो चलिए HIV ka full form से शुरुआत करते है.

hiv ka full form
HIV ka full form


HIV ka full form 


अंग्रेजी भाषा में HIV का फुल फॉर्म "Human immunodeficency virus" होता है जिसको हिंदी में "मानव प्रतिरक्षा अपूर्णता विष्णु" कहा जाता है.

अगर HIV नामक विषाणु मानव शरीर में प्रवेश कर जाए तो यह AIDS नाम की ख़तरनाक बीमारी को जन्म देता है जिसका मेडिकल क्षेत्र में अभी तक इलाज नहीं मिल पाया है लेकिन HIV की अगर समय रहते पहचान कर ली जाए तो एंटीरिट्रोवायरल थेरेपी जिसको ATR भी कहा जाता है उससे रोग के सक्रमण को घटाया जा सकता है जिससे HIV से सक्रमित हुआ व्यक्ति लंबी और सेहतमंद जिंदगी बिता सकता है.

ATR यानि एंटीरिट्रोवायरल थेरेपी एक किस्म का अंग्रेजी दवाओं से किया जाने वाला इलाज है जिसके माध्यम से HIV पर नियंत्रण किया जाता है. इससे HIV फैलने का खतरा कम हो जाता है और शरीर में वायरस की गिणती नहीं बढ़ती.

HIV क्या है 


HIV एक वायरस है जो शरीर में प्रवेश करने के बाद white blood cells को ख़तम कर देता है जिससे व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक शक्ति समाप्त होने लगती है और वो सक्रमण रोगों जैसे कि जुकाम, खांसी, बुखार, फ्लू आदि की चपेट में बहुत जल्दी आ जाता है. HIV मुख्य तौर पर CT4 cells को प्रभावित करता है जो रोगों से लड़ने में सहायक होते है. शरीर में CT4 cells की मात्रा घटने के बाद अनेक प्रकार के सक्रमण और कैंसर जैसे रोगों का खतरा बढ़ जाता है.

एचआईवी कितने प्रकार का होता है? 


एचआईवी दो प्रकार का होता है-

1. HIV 1 (Human immunodeficency virus 1)

2. HIV 2 (Human immunodeficency virus 2)

HIV के अधिकतर मामलों में ज्यादातर व्यक्ति HIV 1 से सक्रमित होते है. विश्व भर में होने वाले एचआईवी सक्रमण में 80% केस ऐसे पाए जाते है जिनमें HIV 1 से ही इन्फेक्शन फैलता है. आम भाषा में HIV 1 को ही HIV वायरस बोल दिया जाता है.

एच आई वी कैसे होता है? 


एच आई वी मुख्य तौर पर चार तरीकों से फैलता है

1. खून से 

2. वीर्य से 

3. स्तनपान से 

4. अंग दान करने से (Organ donation)

1. खून द्वारा सक्रमण:- किसी मरीज़ को अगर HIV से प्रभावित व्यक्ति का खून चढ़ा दिया जाए तो मरीज़ के शरीर में भी HIV प्रवेश कर जाता है. ऐसा तब होता है जब खून की बिना लैब जाँच किए किसी व्यक्ति को चढ़ा दिया जाता है. अविकसित देशों में अक्सर ऐसा होता है.

इसके एलावा HIV से संक्रमित व्यक्ति को लगी हुई सिरिंज की सुई अगर एक स्वस्थ व्यक्ति को लग जाए तो इससे भी HIV फैल जाता है. जो लोग नशा करते है वो अक्सर इस तरीके से HIV की चपेट में आ जाते है क्योंकि नशा करने वाले ज्यादातर व्यक्ति एक दूसरे की सिरिंज का उपयोग कर लेते है.

2. वीर्य से संक्रमण:- वीर्य से संक्रमण तब होता है जब HIV का शिकार व्यक्ति किसी के साथ यौन सम्बन्ध बनाता है. वीर्य से HIV तीन तरीकों से फैलता है -

1. Homosexual:- जब एक पुरुष किसी दूसरे पुरुष से यौन सम्बन्ध बनाता है

2. Heterosexual:- जब कोई पुरुष इस्त्री से यौन सम्बन्ध बनाता है या जब कोई इस्त्री पुरुष से यौन सम्बन्ध बनाती है.

3. Oral sex:- मौखिक रूप से यौन सम्बन्ध बनाने से HIV संक्रमण का खतरा रहता है.

पुरुषों के मुकाबले इस्त्रीयों में HIV होने का खतरा अधिक होता है.

3. स्तनपान से सक्रमण:- HIV से संक्रमित जब कोई माँ अपने शिशु को स्तनपान द्वारा दूध पिलाती है तो इससे शिशु के शरीर में HIV प्रवेश कर जाता है.

 4. Organ Donation:- जब किसी मरीज़ में HIV से संक्रमित व्यक्ति का कोई अंग जैसे किडनी, स्किन आदि चढ़ा दिया जाए तो इससे मरीज़ के शरीर में HIV प्रवेश कर जाता है. यहां तक कि वीर्य दान करने से भी HIV फैल जाता है. इससे महिलाएं प्रभावित होती है.

आमतौर पर एचआईवी का पहला संकेत क्या है? 


एचआईवी के शुरुआती संकेतों को प्राइमरी symptoms कहा जाता है. इसमें सबसे पहले कुछ इस तरह के लक्षण देखने को मिलते है-

1. बुखार के साथ लाल दाने निकलना (Fever with rash)

2. सिरदर्द रहना (Headache)

3. शरीर में दर्द होना (Bodyache)

4. माशपेशियों में दर्द होना (Muscleache)

5. अल्सर (Ulcer)

6. गले में गांठे बन जाना (enlarged lymphnodes)

कब तक एचआईवी के लक्षण दीखने लगते है?


शुरुआत में जब कोई व्यक्ति एचआईवी से संक्रमित होता है तो उसके शरीर में धीरे धीरे वायरस का count बढ़ने लगता है और CT4 cells का count गिरने लगता है. 2-4 हफ्ते में इसके लक्षण दिखने लगते है लेकिन शुरुआती अवस्था में एचआईवी diagnose करना अर्थात पहचान पाना किसी भी डॉक्टर के लिए कठिन होता है.

इसके बाद असिम्पटोमैटिक फेज (asmptomatic phase) की शुरुआत होती है जिसमें एचआईवी का count घटने और CT4 cells का count बढ़ने लगता है. ऐसा मानव शरीर में मौजूद immunity अर्थात रोग प्रतिरोधक शक्ति की वजह से होता है.

असिम्पटोमैटिक फेज कई बार 7-10 साल तक चलता है. इस समय के दौरान एचआईवी का कोई भी लक्षण देखने को नहीं मिलता लेकिन इसके बाद फिर से एचआईवी का count बढ़ने लगता है और CT4 cells की गिणती में गिरावट आ जाती है. इस तरह औसतन 10 साल बाद व्यक्ति में AIDS के लक्षण देखने को मिलते है.

एच आई वी पॉजिटिव क्या है? 


जिस व्यक्ति के शरीर में एच आई वी की मौज़ूदगी पाई जाती है उस व्यक्ति को एच आई वी पॉजिटिव कहा जाता है. शुरू-शुरू में एचआईवी को पहचान पाना डॉक्टर के लिए भी कठिन काम होता है. व्यक्ति को हुए बुखार, जुकाम, सिरदर्द आदि को साधारण लक्षण समझकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है.

लेकिन एच आई वी पॉजिटिव व्यक्ति को अगर शंका हो तो वो खुद डॉक्टर को बताकर एचआईवी का टेस्ट करवा सकता है जिससे ठीक समय पर इसकी पहचान करके AIDS जैसी ख़तरनाक बीमारी से बचा जा सकता है.

एचआईवी और एड्स में अंतर 


अधिकतर लोग एचआईवी और एड्स को एक ही समझते है लेकिन दोनों में काफ़ी अंतर है. एचआईवी की अगर सही समय पर पहचान ना की जाए तो आगे चलकर यह AIDS नामक बीमारी को जन्म देता है लेकिन अगर इसकी पहचान हो जाए तो व्यक्ति एड्स की बीमारी से बच सकता है.

एड्स के लक्षण लक्षण HIV से काफ़ी अलग और ख़तरनाक होते है. एच आई वी के शुरुआती लक्षण (Primary symptoms) एक महीने के अंदर दिखाई देने लगते है उसके बाद असिम्पटोमैटिक फेज  (asmptomatic phase) की की शुरुआत होती है जो तक़रीबन 7-10 साल चलता है.

असिम्पटोमैटिक फेज के बाद माइल्ड symptoms दिखाई देने लगते है. माइल्ड symptoms को भी मेडिकल साइंस में एड्स के लक्षणों की श्रेणी में नहीं डाला जाता. Mild symptoms में इस तरह के लक्षण दिखाई देते है -

1. हल्का बुखार रहना (Low grade fever)

2. सोते समय पसीना आना (Night Swets)

3. भयानक दस्त लगना (Chronic diarrhoea)

4. वजन कम होना (Weight loss)

5. चर्म रोग (Skin diseases like Herpes Zoster)

6. मुँह में सफ़ेदी (Oral hairy leukoplakia)

7. Fungal infection

7-10 साल बाद यह लक्षण शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाने की वजह से दिखाई देने लगते है. Mild symptoms के बाद जो लक्षण दिखाई देते है उसको कहते है AIDS.

AIDS क्या है? 


AIDS HIV के संक्रमण से होने वाली ऐसी बीमारी है जिसमें मानव शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति इतनी कम हो जाती है कि व्यक्ति बड़ी ही आसानी से किसी भी बैक्टीरियल, fungal और वायरल सक्रमण का शिकार हो जाता है. इसका बीमारी का इलाज ना होने की वजह से अन्त में व्यक्ति मौत की कगार पर पहुँच जाता है.

निष्कर्ष 


उम्मीद है आपको पता चल गया होगा एचआईवी का फुल फॉर्म क्या है, एचआईवी क्या है और कैसे होता है साथ ही आप एचआईवी और एड्स में अंतर भी समझ गए होंगे. आपको हमारे द्वारा शेयर की गई जानकारी अच्छी लगी हो तो शेयर करना ना भूले.

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