मुहावरे - Idioms in Hindi

मुहावरे का उपयोग साहित्य में कम और भाषा में अधिक होता है. यह भाषा के सामर्थ्य का प्रतीक होता है. इसका सटीक और निर्दिष्ट अर्थ होता है. मुहावरे के माध्यम से भाषा ऊर्जस्वी बनती है और अर्थ का सटीक संप्रेषण होता है. मुहावरेदार भाषा असरदार होती है.

Idioms in Hindi
Idioms in Hindi 


मुहावरे एक दृष्टि में "गागर में सागर"होते है. गुल खिलना, रंग में भंग होना, नौ-दो ग्यारह होना, गप हाँकना, चिकना घड़ा होना, नानी मरना आदि मुहावरे व्यापक अर्थ में परिपूर्ण है. इनका प्रयोग सुनते ही मन में इनका अर्थ अपने आप उभरने लगता है.

मुहावरे का अर्थ 


मुहावरा ऐसा शब्द समूह होता है, जो अपने शब्दों के निहित अर्थ ना देकर उससे भिन्न किन्तु एक रूढ़ अर्थ देता है. मुहावरा अभिधेय अर्थ का अनुसरण नहीं करता वह अपना विलक्षण अर्थ प्रकट करता है. चूंकि मुहावरा लोक-मानस की स्वाभाविक अभिव्यक्ति होता है अतः इसमें दुरूहता नहीं होती. मुहावरा अपने लोक-परम्परागत रूप में ही शोभायमान और सार्थक होता है. इसका रूप और अर्थ दोनों ही प्राय: रूढ़ होते है.

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1. अंग-अंग ढीला होना (बहुत थक जाना) - अपनी बहन की शादी में काम करते करते मेरा अंग-अंग ढीला हो गया.

2. अंगारे उगलना (क्रोध में अति कठोर शब्द कहना)  - जब औरंगज़ेब के दरबार में शिवाजी ने अपना अपमान होते देखा तो वो अंगारे उगलने लगे.

3. अंगूठा दिखाना (इनकार करना) स्वार्थी मित्र संकट के समय सहायता मांगे जाने पर अंगूठा दिखाकर चले जाते है.

4. अंधे की लकड़ी होना (एकमात्र सहारा) - संतान अपने वृद्ध माता-पिता के लिए अंधे की लकड़ी के सामान होती है.

5.  अँधेरे घर का उजाला होना (इकलौता बेटा) - रामू मेरे भाई की एकमात्र संतान है. वही उसके अँधेरे घर का उजाला है.

6. अक्ल के पीछे लाठी लिए फिरना (हमेशा उल्टा काम करना) - हमारा एक साथी तो हमेशा अक्ल के पीछे लाठी लिए फिरता है.

7. अक्ल पर पत्थर पड़ना (बुद्धि नष्ट हो जाना) - तुम्हारी अक्ल पर तो पत्थर पड़ गए हैं जो तुम मेरी बात समझते ही नहीं.

8. अपना उल्लू सीधा करना (स्वार्थ सिद्ध करना) - आजकल अधिकतर लोग केवल अपना उल्लू सीधा करने के लिए ही मित्र बनते हैं.

9. अपना सा मुँह लेकर रह जाना (लज्जित होना) - हम वहां बड़ी उम्मीद से गए थे, किन्तु उसने ऐसी निराशापूर्ण बात कही जिससे कि हमें अपना-सा मुँह लेकर रह जाना पड़ा.

10. अपनी खिचड़ी आप पकाना (सबसे अलग रहना) - कुछ लोग ऐसे स्वाभाव के होते हैं कि वे किसी से मिलना ही नहीं चाहते, अपनी खिचड़ी आप ही पकाते हैं.

11. अपने मुँह मिया मिट्ठू बनना (अपनी प्रशंसा खुद करना) - अपने मुँह मिया मिट्ठू बनने से क्या होता है, दूसरे लोग तुम्हारी प्रशंसा करें तब बात है.

12. अपने पैरों पर खड़ा होना (आत्मनिर्भर होना) - जब तक तुम इस योग्य ना हो जाओ कि अपने पैरों पर खड़े हो सको तब तक तुम्हें विवाह के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए.

13. आंख की किरकिरी होना (अप्रिय होना) - राम व्यर्थ में ही मुझे आंख की किरकिरी समझता है.

14. आँख चुराना (सामने आने से घबराना) - जब से उसने मुझसे उधार पैसे लिए है तब से वो मुझसे आँख चुराता फिरता है.

15. आँखें नीली पिली करना (क्रोध में आना) - मैंने कोई गलत काम नहीं किया है इसलिए व्यर्थ में आँखें नीली पिली ना करे.

16. आँखें फेर लेना (उपेक्षा करना) - स्वार्थी मित्र संकट के समय में आँखें फेर लेते है.

17. आँखों का तारा होना (अत्यंत प्रिय) - कृष्ण अपने माँ बाप की आँखों का तारा है

18. आँखों का पानी ढल जाना (बेशर्म हो जाना) - उसके माँ-बाप उसे बहुत समझाते भुझाते है किन्तु उसकी आँखों का पानी ढल गया है. उस पर किसी बात का असर होता ही नहीं.

19. आँख में धूल झोंकना (धोखा देना) - जो लोग दूसरों की आँखों में धूल झोंकने की कोशिश करते है वे वस्तुता: खुद को ही धोखा देते हैं.

20. आकाश-पाताल एक करना (बहुत अधिक परिश्रम करना) - राम ने नौकरी प्राप्त करने के लिए आकाश पाताल एक कर दिया.

21. आग पर घी डालना (क्रोध को बढ़ाना, लड़ाई को हवा देना) - कुछ लोगों को आग में घी डालने की इतनी बुरी आदत होती है कि दो मित्रों में कभी सुलह नहीं होने देते.

22. आटे-दाल का भाव मालूम होना (जीवन में कष्टों का अनुभव करना) - अब तक तो तुम अकेले थे, कुछ पता नहीं चला; शादी हो जाने के बाद अब तुम्हें आटे-दाल का भाव मालूम होगा.

23. आम के आम गुठलियों के दाम (दोहरा लाभ)  - मूंगफली के व्यापार में आम के आम गुठलियों के दाम में मिलते है क्योंकि उसकी गिरी से तेल निकालकर खली बिक जाती है और मूंगफली का छिलका भी बिक जाता है.

24. आस्तीन का साँप (विश्वासघाती) - उस पर कभी विश्वास मत करो वो आस्तीन का साँप है.

25. ईंट से ईंट बजाना (नष्ट-भृष्ट कर देना) - शिवाजी ने मुगल साम्राज्य की ईंट से ईंट बजा दी.

26. ईद का चाँद होना (बहुत कम दिखाई पड़ना) - तुम तो ईद का चाँद हो गए हो कभी इधर आते ही नहीं.

27. उड़ती चिड़िया पहचानना (मन की ताड़ लेना अर्थात जान लेना) मुझसे अपनी परेशानी क्यों छुपाते हो मैं मन की बात पहचान लेता हूँ.

28. उल्लू सीधा करना (काम निकलना) - अधिकांश लोग उल्लू सीधा होते ही बात नहीं करते.

29. ऊँट के मुँह में जीरा (आवश्यकता से बहुत कम देना) - रेल हादसे में मारे गए लोगों के परिवार को सरकार द्वारा 25-25 हज़ार की सहायता ऊँट के मुँह में जीरा देने के सामान है.

30. एक अनार सौ बीमार (किसी चीज़ की मांग आपूर्ति से अधिक होना) - यह वस्तु मैं किस-किस को दूँ, इसके मांगने वाले इतने अधिक हैं कि यह एक अनार सौ बीमार वाली बात हो रही है.

31. एक तीर से दो शिकार करना (एक साथ दो मतलब पूरे करना) - तुम्हारे ऐसा कहने से एक तीर से दो शिकार होंगे, एक तो उसकी सबके सामने पोल खुल जाएगी और तुम्हारा काम भी बन जाएगा.

32. एक थैली के चट्टे बट्टे होना (एक ही स्वाभाव के होना) - तुम सभी एक ही थाली के चट्टे बट्टे हो कोई किसी से कम नहीं.

33. एक हाथ से ताली ना बजना (किसी काम के लिए एक ही व्यक्ति उत्तरदायी नहीं होता) - एक हाथ से ताली नहीं बजती, तुमने अवश्य कुछ ना कुछ ऐसी बात जरूर कही होगी जिसका यह परिणाम निकला.

34. ओखलीं में सिर देना (जानते हुए किसी कष्ट में पड़ना) - ट्रैफिक नियमों की उलंघना करना ओखलीं में सिर देने के बराबर है क्योंकि इससे दुर्घटना हो सकती है.

35. कच्ची गोलियां खेलना (अनुभव की कमी होना) - मैंने कोई कच्ची गोलियां नहीं खेली है जो मैं तुम्हारी बातों में आ जाऊंगा.

36. कटे पर नमक छिड़कना (दुखी को और दुखी करना) - तुम यह बात कहकर कटे पर नमक छिड़कना चाहते हो.

37. कठपुतली की तरह नाचना (किसी के कहने के अनुसार कार्य करते रहना) - पता नहीं उसने महेश पर कैसा जादू किया है कि वह उसके सामने कठपुतली की तरह नाचता रहता है.

38. कब्र के मुर्दे उखाड़ना (पुरानी बातों की याद दिलाना) जो बात हो गई सो हो गई, कब्र के मुर्दे उखाड़ने का क्या लाभ.

39. कलई खुलना (सच्ची बात प्रगट हो जाना) - तुम कब तक अपने फेल होने की बात छुपाओगे, एक ना एक दिन कलई खुलेगी ही.

40. कलेजा दो टूक होना (बहुत दुखी होना) - तुमने आज जैसी बातें कही है उससे मेरा कलेजा दो टूक हो गया है.

41. कलेजे पर साँप लेटना (डाह से जलना) - मेरी तरक्की देखकर उसके कलेजे पर साँप लेट गया.

42. कांटे बिछाना (रुकावटें पैदा करना) - जो दूसरे के रास्ते में काँटे बिछाता है वो खुद ही उसमें उलझता है.

43. काटो तो खून नहीं (डर से पीला पड़ जाना) - चोरी करते समय पकड़े जाने पर उसकी दशा ऐसी हो गई कि काटो तो खून नहीं.

44. काठ का उल्लू (मुर्ख) - वह पढ़ा लिखा तो बहुत है लेकिन सांसारिक मामलों में काठ का उल्लू है.

45. कान का कच्चा (बिना जाँच के प्रत्येक बात पर विश्वास कर लेने वाला) - जो व्यक्ति कान के कच्चे होते है वो मित्र बनाने के योग्य नहीं होते.

46. कान पर जूं ना रेंगना (तनिक भी ध्यान ना देना) - मैंने उसी कई बार समझाया कि पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान दो परन्तु उसके कान पर जूं तक नहीं रेंगी.

47. कान में तेल डालना (किसी की बात ना सुनना) - कृष्णा के नौकरी कर लेने पर सबने उसकी टिका टिप्पणी की किन्तु वो कान में तेल डाले रही.

48. किताब का कीड़ा होना (दिन-रात पढ़ते रहना) - रविंद्र खेल-कूद में दिलचस्पी नहीं रखता वो तो सिर्फ किताब का कीड़ा है.

49. किस खेत की मूली (अत्यंत तुच्छ) - तुम हो किस खेत की मूली? मैं तुम जैसे लोगों की परवाह नहीं करता.

50. कोल्हू का बैल बनना (दिन रात काम में लगे रहना) - तुम तो हर समय कोल्हू के बैल बने रहते हो, तभी तो तुम्हारा स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता.

51. कौड़ी कौड़ी को मोहताज़ होना (पास में एक पैसा ना होना) - जबसे उसकी नौकरी छूटी है तबसे वो कौड़ी कौड़ी का मोहताज़ हो गया है.

52. खटाई में पड़ना (उलझ जाना) - तुम्हारी तरक्की का मामला खटाई में पड़ गया है.

53. खाने दौड़ना (झल्ला उठना) - मैंने कुछ कहा भी है कि आप खाने दौड़ रहे है.

54. खून पसीना एक करना (अत्त्याधिक परिश्रम करना) - किसान खेतों में फसल की अच्छी उपज के लिए अपना खून पसीना एक कर देते है लेकिन उनको फसल का सही भाव फिर भी नहीं मिलता.

55. गंगाजली उठाना (हाथ में गंगा जल लेकर सौगंध खाना) - संदिघ्द ने न्यायाधीश के सामने कहा कि वो गंगाजली उठाकर सौगंध खाता है कि वो निर्दोष है.

56. गज भर की छाती होना (उत्साह से भर जाना) - अपनी पुत्री के परीक्षा में प्रथम आने पर उसकी गज भर की छाती हो गई.

57. गहरा हाथ मारना (बहुत माल प्राप्त करना) - जगदीश ने अपने पुत्र के विवाह में गहरा हाथ मारा है.

58. गांठ का पूरा (धनी व्यक्ति) - वह ऊपर से कैसा ही प्रतीत हो लेकिन है गांठ का पूरा.

59. गागर में सागर भरना (थोड़े शब्दों में बहुत कुछ कह देना) - वह बहुत कम बोलता है किन्तु जब भी बोलता है तो उसकी गागर में सागर भरा होता है.

60. गाजर-मूली समझना (बहुत तुच्छ समझना) - शिवाजी मुगल सैनिकों को गाजर मूली की तरह समझते थे.

61. गाढ़े पसीने की कमाई (मेहनत से कमाया हुआ धन) - यह मेरे गाढ़े पसीने की कमाई है, मैं नहीं चाहता इसे व्यर्थ में पानी की तरह बहाया जाए.

62. गिरगिट की तरह रंग बदलना (कभी कुछ कहना और कभी कुछ) - आज-कल विधान सभाओं के अनेक सदस्य गिरगिट की तरह रंग बदलते दिखाई देते रहते है.

63. गुड़ गोबर करना (बना काम बिगाड़ देना) - तुमने यह सब कहकर सारा गुड़ गोबर कर दिया.

64. गुल खिलना (नई-नई बातें सामने आना) - देखते जाओ कि उसकी इस विभेद की नीति से क्या-क्या गुल खिलते है.

65. गोबर गणेश (मुर्ख) - तुम बिलकुल गोबर गणेश हो, अपने हित की बात नहीं समझते.

66. घड़ों पानी पड़ना (अति लज्जित होना) - चुगली करने की बात खुल जाने पर उसपर घड़ों पानी पड़ गया.

67. घर का दिया बुझ जाना (इकलौते पुत्र की मृत्यु हो जाना) - दीपक उसका इकलौता पुत्र था, उसके मर जाने से उसके घर का दिया ही बुझ गया.

68. घाट-घाट का पानी पीना (जगह-जगह से अनुभव प्राप्त करना) - मुसीबत के समय में उसको घाट-घाट का पानी पीना पड़ा है.

69. घाव पर नमक छिड़कना (दुखी को (कठोर शब्द से) और दुखी करना) - तुम्हारे यह शब्द मेरे घाव पर नमक छिड़कने का काम कर रहे है.

70. घास काटना (किसी काम को लापरवाही से करना) - घास मत काटो, जरा धीरे धीरे अच्छी तरह पढ़ो.

71. घी के दिए जलाना (खूब खुशियाँ मनाना) - जिस दिन मेरे भाई को नौकरी मिल जाएगी मैं घी के दिए जलाऊंगा.

72. घुटने टेक देना (हार मान लेना) - सेल्यूकस ने चंद्रगुप्त मौर्या के सामने घुटने टेक दिए.

73. घोड़े बेचकर सोना (निश्चिन्त होकर सोना) - बहन का विवाह करने के पश्चात वह ऐसे सो गया जैसे घोड़े बेचकर सोया हो.

74. चलता पुर्जा (चालाक व्यक्ति) - चंद्र बड़ा ही चलता पुर्जा है उससे बचकर रहना.

75. चाँदी का जूता मारना (रुपए के बल पर दबाना) - वह तो चाँदी का जूता मारती है और सबसे अपना काम करवा लेती है.

76. चाँदी होना (अत्यधिक लाभ होना) - आजकल महंगाई के जमाने में व्यापारियों की चाँदी है.

77. चादर देखकर पैर फैलाना (अपनी शक्ति के अनुसार कार्य करना) - बुद्धिमानी इसी में है कि अपनी चादर देखकर पैर पसारे जाए अन्यथा जीवन में बड़ी कठनाइयों का सामना करना पड़ता है.

78.चार चाँद लगना (शोभा बढ़ना) वो सुन्दर तो है ही, इस साड़ी को पहनने के बाद उसकी सुंदरता में चार चाँद लग जाते है.

79. चार दिन की चांदनी (थोड़े दिनों का सुख) - तुम इतना घमंड क्यों करते हो, यह सुख तो चार दिन की चांदनी है, कभी दुख के दिन भी आ सकते है.

80. चिकना घड़ा होना (किसी बात का असर ना पड़ना) - वह तो बिलकुल चिकना घड़ा हो गया है, उसपर कहे सुने का असर पड़ता ही नहीं.

81. चिकनी चुपड़ी बातें बनाना (बनावटी बातें करना) - कुछ लोग चिकनी चुपड़ी बातें बनाकर अपना काम बनाने में बड़े निपुण होते है.

82. चिराग लेकर ढूंढ़ना (बहुत शानबीन करना)- तुम यदि चिराग लेकर भी ढूंढो तब भी तुम्हें ऐसा सज्जन नहीं मिलेगा.

83. चुल्लू भर पानी में डूब मरना (मुँह दिखाने योग्य ना रहना) - तीसरी बार भी परीक्षा में फेल हो जाने पर उसे चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए.

84. चूना लगाना (धोखा देना) - कितनी भी सावधानी से काम लो किन्तु कभी कभी दुकानदार चूना लगा ही देते है.

85. चोली दामन का साथ होना (अटूट सम्बन्ध होना) - भारत और नेपाल का चोली दामन का साथ है.

86. छक्के छूटना (हिम्मत हार जाना) - भारतीयों की वीरता देखकर पाकिस्तानी सैनिकों के छक्के छूट गए.

87. छठी का दूध याद आना (घोर कष्ट में पड़ना) - मैं तुम्हें ऐसी मार लगाऊंगा कि तुम्हें छठी का दूध याद आ जाएगा.

88. छप्पर फाड़कर देना (बिना परिश्रम के धन मिलना) - भगवान जब देता है तो छप्पर फाड़कर देता है.

89. छाती पर मूंग दलना (हमेशा दुख देना) - तू इस तरह छाती पर मूंग ही दलता रहेगा या जाकर काम भी ढूंढेगा?

90. जरा सा मुँह निकल आना (दुर्बल हो जाना) - उसपर इन दिनों इतना काम पड़ा है कि उसका जरा सा मुँह निकल आया है.

91. जली कटी कहना (कठोर बातें कहना) - वो हमेशा जली कटी बातें कहता रहता है पता नहीं क्या चाहता है.

92. जहर का घूंट पीकर रह जाना (अपमान को चुप चाप सहन कर लेना) - यधपि उसने सबके सामने मेरा अपमान किया किन्तु फिर भी मैं आपका ख्याल करके जहर का घूंट पीकर रह गया.

93. जहर की पुड़िया (उपद्रवी व्यक्ति) - वह सीधी नहीं है जहर की पुड़िया है.

94. झंडा गाड़ना (अधिकार करना) - शिवाजी ने तोरण के किले को जीतकर उसपर अपना झंडा गाड़ दिया.

95. टट्टी की आड़ में शिकार खेलना (छिपे ढंग से चाल चलना) - टट्टी की आड़ में शिकार खेलने में क्या बहादुरी है, हिम्मत है तो सामने आकर मुकाबला करो.

96. टोपी उछालना (अपमानित करना) - महेश ने सबके सामने मेरी टोपी उछाली यह उसने अच्छा नहीं किया.

97. ठोकना बजाना (अच्छी तरह परखना) - जिस तरह तुम हर वस्तु परखकर खरीदते हो उसी तरह मित्र भी ठोक बजाकर बनाना चाहिए.

98. डंके की चोट पर (खुल्लम खुल्ला स्पष्ट शब्दों में कहना) - मैं डंके की चोट पर कहता हूँ की किसी भी हालत में उसका साथ नहीं छोडूंगा.

99. डूबते को तिनके का सहारा (असहाय को थोड़ी सहायता भी काम कर जाती है) - तुम्हारी थोड़ी सहायता ही डूबते को तिनके का सहारा साबित हुई.

100. डेढ़ चावल की खिचड़ी पकाना (सबसे अलग रहकर कार्य करना) - कुछ लोग ऐसे होते है जो डेढ़ चावल की खिचड़ी पकाना चाहते है परन्तु समाज़ ऐसे लोगों को सम्मान नहीं देता.

101. ढेर हो जाना (मर जाना) - उसने डाकू पर लाठी से इतनी जोर से परहार किया कि डाकू ढेर हो गया.

102. तलवार के घाट उतारना (तलवार से मारना) - हल्दीघाटी के मैदान में राजपूतों ने असंख्य मुगल सैनिकों को तलवार के घाट उतार दिया.

103. तारे गिनना (रात भर जागना) - मैं उसकी स्मृति में रात भर तारे गिनता रहा, एक पल को भी नींद नहीं आई.

104. तिल का ताड़ बनाना (छोटी सी बात को बहुत बढ़ाना) - बहुत लोगों को तिल का ताड़ बनाने में बहुत आनंद आता है.

105. तिलों में तेल ना होना (कोई आशा ना होना) - तुम किस से पार्टी (दावत) मांग रहे हो इन तिलों में तेल नहीं है.

106. तेली का बैल होना (दिन रात काम में लगे रहना) - तुम तो हमेशा तेली के बैल के सामान काम में लगे रहते हो.

107. थाली का बैंगन होना (स्वार्थवश कभी किसी का साथ देना कभी किसी का) - तुम तो बिलकुल थाली के बैंगन हो तुम्हारा कोई भरोसा नहीं.

108. दाँत कटी रोटी (गहरी मित्रता) - जोशी और कैलाश में दाँत कटी रोटी थी किन्तु पता नहीं क्यों आजकल वे एक दूसरे से दूर दूर रहते है.

109. दाँत खट्टे करना (हरा देना) - शिवाजी ने औरंगज़ेब की सेना के दाँत खट्टे कर दिए.

110. दाल में काला होना (किसी बात की शंका होना) - वह बार-बार इधर आता है अवश्य दाल में कुछ काला है.

111. दिन दूनी रात चौगुनी (बहुत तेज़ी से) - स्वंत्रता मिलने के पश्चात भारत ने दिन दुगनी रात चौगुनी तरक्की की है.

112. दूध का दूध पानी का पानी (सच्चा न्याय) - राजा विक्रमादित्य अत्यंत पेचीदा मामलों में भी दूध का दूध और पानी का पानी कर देते थे.

113. दो नावों में पाँव रखना (दोनों पक्षों का समर्थन करना) - जो लोग दो नावों में पैर रखते है वो किसी के भले नहीं बन पाते.

114. धूप में बाल सफ़ेद ना करना (बहुत अनुभवी होना) - मेरे बाल धूप में सफ़ेद नहीं हुए, मैं सब कुछ जानता हूँ.

115. नाक पर मक्खी ना बैठने देना (किसी को कुछ कहने का अवसर ना देना) - वह बहुत सिद्धांतवादी है नाक पर मक्खी नहीं बैठने देता.

116. पांचों उंगलियां घी में होना (बहुत लाभ होना) - आजकल व्यापारियों की पांचों उंगलियां घी में है.

117. पाँव उखड़ जाना (हारकर भागना) - राणा सांगा की सेना को देखकर बाबर की सेना के पाँव उखड़ गए.

118. पापड़ बेलना (मुसीबत झेलना) - मैंने अपनी ज़िन्दगी में बहुत पापड़ बेले है तब कहीं जाकर यह दिन देखने को मिला.

119. पेट का हल्का होना (किसी बात को छिपा ना सकना) जो मनुष्य पेट के हलके होते है, वे सबके बुरे बन जाते है.

120. पौ बारह होना ( लाभ ही लाभ होना) - महंगाई के ज़माने में व्यापारियों की पौ बारह है.

121. बाल की खाल निकलना (सूक्ष्म विवेचन करना) - तर्क करने वाले हर बात में बात की खाल उतारते है.

122. बाल बांका ना होना (तनिक भी हानि ना होना) - आग में प्रहलाद का तो बाल भी बांका नहीं हुआ किन्तु उसकी भुआ होलिका जलकर भस्म हो गई.

123. मुँह में पानी भर आना (लालच आना) - लोमड़ी ने जब अंगूर लटकते देखे तो उसके मुँह में पानी भर आया. 

124. मुट्ठी गर्म करना (रिश्वत देना) - तुम्हें इस काम के लिए अधिकारियों की मुट्ठी गर्म करनी पड़ेगी. 

125. रंग में भंग पड़ना (मज़ा किरकिरा होना) - उत्सव के समय यकायक पानी बरसने से रंग में भंग पड़ गया. 

126. लकीर का फकीर होना (पुरानी नीति पर चलना) - तुम तो बिलकुल लकीर के फकीर हो, किसी बात को तर्क की कसौटी पर कसना ही नहीं चाहते. 

127. लोहा मान लेना (किसी की श्रेष्ठता सवीकार कर लेना) - सिकंदर ने पोरस के विरुद्ध युद्ध में भारतीय वीरों का लोहा मान लिया. 

128. शेर बकरी का एक घाट पानी पीना (अन्याय का ना होना) - अशोक के राज्य में शेर बकरी एक घाट पर पानी पीते थे. 

129. सफ़ेद झूठ बोलना (सरासर झूठ बोलना) - तुम सफेद झूठ बोलते हो ऐसा कभी नहीं हो सकता.

130. सिर पर कफ़न बांधना (मरने के लिए त्यार होना) - भारत को स्वतंत्र कराने के लिए अनेक वीरों ने सिर पर कफन बांध लिया था. 

131. सिर पर भूत सवार होना (किसी धुन पर अड़े होना) - जब शांति के सिर पर भूत सवार होता है तो उसे कोई नहीं समझा सकता. 

132. सूर्य को दीपक दिखाना (महान व्यक्ति का परिचय देने की कोशिश करना) - स्वामी विवेकानंद के विषय में कुछ कहना सूर्य को दीपक दिखाने के सामान है. 

133. सूर्य पर थूकना (किसी महान व्यक्ति को कलंकित करने के प्रयास में स्वयं बुरा बन जाना) - अपने ऋषि मुनियों पर किसी किस्म का आक्षेप लगाना सूर्य पर थूकना है. 

134. हाथ धोकर पीछे पड़ना (बुरी तरह सताना) - वह तो हाथ धोकर मेरे पीछे पड़ गया है, मैं कितना ही अच्छा काम क्यों ना करूँ, वह कोई ना कोई गलती निकाल ही देता है. 

135. हाथ पाँव फूल जाना (बहुत घबरा जाना) - दंगाइयों के अचानक घर में घुस आने पर मेरे हाथ पैर फूल गए. 

136. हाथों के तोते उड़ जाना (सुध बुद्ध खोना) - दुकान खोलते ही सेठ जी ने जब देखा कि तिज़ोरी खुली पड़ी है तो उनके हाथों के तोते उड़ गए. 

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