NRC kya hai- एनआरसी क्या है - NRC ka full form in Hindi

क्या आपको पता है कि NRC क्या है और NRC ka full form क्या है यदि नहीं तो इस आर्टिकल में NRC से जुड़ी सारी जानकारी आपको पढ़ने को मिलेगी. भारत सरकार द्वारा CAB यानि Citizenship amendment bill पेश करने के बाद विपक्षी पार्टियों के विरोध के बावज़ूद इसको विधान सभा में पारित करके एक्ट में तबदील कर दिया गया है अर्थात बिल को क़ानून बना दिया गया है जिसमें भारत के बाहर से आकर यहां रहने वाले लोगों और भारत में रहने वाले लोगों को नागरिकता देने के लिए कुछ नियम बनाए गए है जिसके लिए लोगों को NRC की प्रक्रिया से गुजरना होगा.

यह भी वर्णनीय है कि CAA के अंतर्गत अलग-अलग धर्म के लोगों को निगरिकता प्रदान करने का नियम भी अलग-अलग है. इसलिए आपको CAA और NRC दोनों की जानकारी होना जरुरी है.

आपके मन में NRC और CAB को लेकर बहुत सारे सवाल चल रहे होंगे जैसे कि CAB क्या है, NRC क्या है, NRC ka full form क्या है, NRC के लिए किन दस्तावेज़ों की जरुरत है, NRC के लिए कौन से डाक्यूमेंट्स वैलिड है आदि. इस उल्लेख में हम आपके इन्हीं सभी प्रश्नों का उत्तर देने वाले है. NRC क्या है उसे समझने से पहले हमें nrc ka full form पता होना चाहिए.

NRC ka full form 


NRC ka full form है National Register of Citizens जिसको हिंदी में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर या सूची भी कहा जाता है. NRC की सूची में शामिल होने वाले लोगों को ही नागरिकता प्रदान की जाती है. यह प्रक्रिया सरकार द्वारा करवाई जाती है जिसमें लोगों की नागरिकता की शनाख़्त की जाती है.

nrc ka full form
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NRC क्या है 


NRC एक क़ानूनी प्रिक्रिया है जिसके अंतर्गत किसी देश के लोगों को अपनी नागरिकता साबित करनी पड़ती है. इस प्रक्रिया के दौरान यदि कोई व्यक्ति अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाता तो उसको विदेशी या घुसपैठियाँ घोषित करके detention center में भेज दिया जाता है जिसके बाद उस व्यक्ति को क़ानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.

नागरिकता साबित करने के लिए सरकार द्वारा प्रमाणित दस्तावेज़ों की जरुरत पड़ती है. इसके लिए किन दस्तावेज़ों की जरुरत पड़ती है यह भी सरकार द्वारा ही निर्धारित किया जाता है. भारत में होने वाली NRC की प्रक्रिया में किन dcocuments की जरुरत पड़ेगी यह हम आपको आगे बताने वाले है इसलिए पोस्ट को ध्यान से पढ़ते रहिए. 

nrc kya hai
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NRC के माध्यम से यदि कोई अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाता तो CAA के नियमों के अनुसार किसे नागरिकता देनी है और किसे नहीं देनी इसके लिए इस्लाम धर्म को छोड़कर बाकी सभी के लिए जैसे कि हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई आदि के लिए एक ही नियम है लेकिन यदि NRC में कोई मुस्लमान खुद को भारत का नागरिक साबित नहीं कर पाता तो उसको नागरिकता नहीं मिलेगी.

इसका कारण यह है कि CAA के तहत यह नियम बनाया गया है कि पड़ोसी देशों में जो अल्पसंख्यक आबादी धार्मिक प्रताड़ना सहन कर रही है केवल उन्हीं को नागरिकता प्रदान की जाएगी जबकि पड़ोसी देशों में मुसलमान बहुसंख्यक है ऐसे में वो धार्मिक प्रताड़ना का शिकार हों ऐसा संभव नहीं है इसलिए उनको इस सूची से बाहर रखा गया है. पड़ोसी देशों की लिस्ट में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश आता है.

भारत सरकार द्वारा NRC इसलिए करवाई जा रही है तांकि भारत के बाहर से आकार लंबे समय से भारत में रहने वाले लोगों की पहचान की जा सके और पड़ोसी देशों में यदि कोई अल्पसंख्यक धार्मिक भेद-भाव का शिकार हो रहा है तो उसको नागरिकता प्रदान की जा सके. एनआरसी में नागरिक ना पाया जाने वाला अवैध नागरिक कहलाएगा.

एनआरसी में शामिल होने के लिए क्या जरुरी है 


एनआरसी में शामिल होने के लिए जो सबसे जरुरी बात है वो यह है कि आपको यह साबित करना होगा कि आप 1951 से पहले से भारत में रह रहे है. यदि आपका जन्म 1951 के बाद हुआ है तो आपको यह साबित करना होगा कि आपके पूर्वज या बड़े-बजुर्ग 1951 के पहले से भारत में रह रहे है.

सरकार का यह कहना है कि यह प्रावधान इसलिए रखा गया है क्योंकि बांग्लादेश की आज़ादी के बाद 1951 में बहुत सारे बांग्लादेशी भारत के असम और पश्चिम बंगाल राज्य में अवैध ढंग से घुस आए थे. जिनकी पहचान करने के लिए असम में सबसे पहले एनआरसी लागू की गई जिसमें 19 लाख से अधिक लोग घुसपैठिए पाए गए अर्थात गैर-भारतीय पाए गए जिनमें 3 लाख लोग मुस्लमान और बाकी हिन्दू थे.

अब विवाद इसी बात को लेकर हो रहा है कि सरकार ने CAA यानि नागरिकता संशोधन एक्ट में यह बात लागू कर दी है कि यदि कोई व्यक्ति जो मुस्लिम नहीं है एनआरसी में विदेशी पाया जाता है तो उसको छे साल भारत में रहने के बाद नागरिकता दे दी जाएगी लेकिन अगर कोई मुस्लमान एनआरसी में अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाता तो उसको निगरिकता नहीं दी जाएगी.

जैसा कि हम ऊपर बता चुके है सरकार ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि वो पड़ोसी देशों जैसे कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में रह रहे उन्हीं अल्पसंख़्यक (हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाईयों) को नागरिकता देंगे जो वहां धार्मिक प्रताड़ना का शिकार हो रहे है. सरकार का यह भी कहना है कि मुसलमानों की पड़ोसी देशों में आबादी बहुसंख्या में है इसलिए उनपर यह नियम लागू नहीं होगा

लेकिन विवाद इस बात हो रहा है कि अगर भारतीय मुस्लमान भी दस्तावेज़ों की कमी के कारण अपनी नागरिकता साबित ना कर पाए तो उनका क्या होगा? दूसरा प्रशन यह भी उठ रहा है कि अगर कोई गैर-मुस्लमान अपनी नागरिकता साबित ना कर पाया तो वो अपने ही देश में 6 साल तक शरणार्थी बनकर क्यों रहेगा?

एनआरसी के लिए किन दस्तावेज़ों की जरुरत है 


यदि आप सोच रहे हो कि आप अपनी नागरिकता आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर कार्ड या पासपोर्ट की साहयता से साबित कर दोगे तो आप गलत सोच रहे हैं. सरकार ने एनआरसी के लिए यह नियम बनाया है कि आपको वो दस्तावेज़ दिखाने होंगे जिनसे यह साबित हो कि आप 1951 के पहले से भारत में रह रहे है या आपके पूर्वज 1951 से पहले भारत में रहते थे.

इसके लिए आपको मकान या अपनी जायदाद की कोई रजिस्ट्री दिखानी पड़ सकती है जो आपके या आपके किसी पूर्वज के नाम पर हो. इसके एलावा आप कोई भी ऐसा डॉक्यूमेंट दिखा सकते है जिससे यह साबित होता हो कि आप या आपके पूर्वज 1951 से पहले भारत में रह रहे थे.

यदि आधार कार्ड, पासपोर्ट आदि की बात की जाए तो इनसे नागरिकता साबित नहीं की जा सकती क्योंकि अधिकतर लोगों के यह दस्तावेज़ 1951 के बाद ही बने होंगे. आधार कार्ड 2014 में लागू किया गया और पासपोर्ट की वैलिडिटी केवल दस साल की होती है जिसको हर 10 साल बाद renew करवाना पड़ता है.

एनआरसी में शामिल ना होने वाले लोगों का क्या होगा 


अगर कोई व्यक्ति भले ही किसी भी धर्म से सम्बंधित हो यह साबित नहीं कर पाता कि वो या उसके पूर्वज 1951 से पहले भारत में रहते थे तो उसको घुस्पेठिया या विदेशी घोषित कर दिया जाएगा जिसके बाद उनको जेल या detention centers में रहना पड़ सकता है.

इसमें अंतर केवल यह है कि अगर कोई हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन या ईसाई खुद को भारतीय साबित नहीं कर पाता तो उसको क़ानूनी प्रिक्रिया के बाद नागरिकता प्रदान कर दी जाएगी लेकिन इसके लिए शर्त यह होगी कि उसको 6 साल तक भारत में शरणर्थी बनकर रहना होगा लेकिन अगर कोई व्यक्ति जो मुस्लमान हो वो अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाया तो उसको नागरिकता नहीं दी जाएगी. गैर-भारतीय साबित होने के बाद उसको वापिस अपने देश भेजा जा सकता है और NRC में सही पाए जाने व्यक्ति को कोई समस्या नहीं होगी उसको तुरंत नागरिकता प्रदान कर दी जाएगी।

इस पर विवाद अब यह भी है कि भारत में बहुत सारे ऐसे लोग है जो गरीब है और अपनी property के दस्तावेज़ दिखाकर अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सकते क्योंकि उनके या उनके पूर्वजों के पास कभी property थी ही नहीं ऐसे में उनके लिए मुश्किल हो सकती है कि उनको एनआरसी में नागरिकता साबित ना होने पर विदेशी घोषित कर दिया जाए और उनको भारत में 6 साल तक शरणार्थी बनकर रहना पड़े.

यह थी एनआरसी के बारे में पूरी जानकारी अब हम CAA पर संक्षेप में बात करते है और इसे समझने की कोशिश करते है कि CAA क्या है? 

CAA ka full form 


CAA का full form है Citizenship amendment act यह सरकार द्वारा लागू किया गया एक ऐसा क़ानून है जिसमें यह निर्धारित किया गया है कि किसको नागरिकता देना है और किसको नहीं. CAA पहले बिल के रूप में पेश किया गया था जिसको CAB के नाम से जाना जाता है.

CAB full form 


CAB का full form है Citizenship amendment bill जो प्रस्ताव के रूप में बीजेपी सरकार द्वारा पेश किया गया था. विधान सभा में पारित और राष्ट्रपति की मंज़ूरी के बाद अब यह क़ानून बन चुका है जिसको CAA यानि Citizenship amendment act कहा जाता है.

CAA क्या है 


CAA यानि Citizenship amendment act एक क़ानून है जिसमें सरकार द्वारा भारत में रहने वाले और भारत के बाहर से यहां आकार रहने वाले लोगों को नागरिकता देने या ना देने के लिए कुछ नियम बनाए है.

इस क़ानून के अंतर्गत भारत के पड़ोसी देशों में रहने वाले या पड़ोसी देशों से आकर भारत में रह रहे अल्पसंख्यकों जैसे कि हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन और ईसाइयों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान रखा गया है.

इस क़ानून के मुताबिक मुस्लमान जो पड़ोसी देशों से आकर अवैध ढंग से भारत में रह रहे है उनको नागरिकता नहीं दी जाएगी.

अल्पसंख्यकों को नागरिकता केवल तभी मिलेगी अगर वो भारत में 31 दिसंबर, 2014 के पहले से रह रहे है. एनआरसी में नागरिकता ना साबित होने पर उनको 6 साल तक भारत में शरणार्थी बनकर रहना होगा जिसके बाद उनको नागरिकता प्रदान कर दी जाएगी.

CAA को लेकर क्यों प्रदर्शन हो रहे है 


भारत सरकार द्वारा CAA यानि Citizenship amendment act लागू करने के बाद देश के काफ़ी हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए जिसका मुख्य कारण यह है कि सरकार ने गैर-मुस्लिम यानि हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन आदि को अवैध नागरिक पाए जाने पर भी उनको नागरिकता देने का प्रावधान रखा है लेकिन मुस्लमानों को इसमें से बाहर रखा गया है.

इसपर मुस्लमान भाईचारे का कहना है कि अधिकतर लोगों के अपनी नागरिकता साबित करना कठिन हो जाएगा क्योंकि उनके पास ऐसे दस्तावेज़ नहीं है जो यह साबित करते हो कि वह या उनके पूर्वज 1951 के पहले से भारत में रह रहे थे. ऐसे में भारतीय मुस्लमान वो विभाजन के समय से भारत में रह रहे है अगर वो अपनी नागरिकता साबित ना कर पाए तो उनका क्या होगा. इसी बात को लेकर जगह-जगह विरोध प्रदर्शन चल रहे है.

वहीं असम में विरोध प्रदर्शन का एक और कारण पाया गया है. असम में कुछ लोगों द्वारा अवैध नागरिकों को भारत से बाहर निकालने के प्रदर्शन हो रहे है क्योंकि लोगों का कहना है कि अवैध नागरिकों की वजह से वो अपने अधिकारों से वंचित रह रहे है.

दूसरी तरफ सरकार के इस फैसले से सहमत लोगों द्वारा CAA का विरोध करने वालों के खिलाफ़ प्रदर्शन देखने को मिल रहे है. इस तरह प्रदर्शन करने वाले अलग-अलग समुदायों का अपना अपना तर्क है.

क्या CAA का भारत के मुसलमानों पर फर्क पड़ेगा 


भारत सरकार विशेष तौर पर बयान जारी करके यह कह चुकी है कि CAA के कारण भारत के किसी भी समुदाय को कोई फर्क नहीं पड़ेगा. यह क़ानून केवल उन लोगों के लिए है जो भारत में अवैध तरीके (वीज़ा के बगैर) से घुस कर यहां रह रहे है या जो लोग धार्मिक भेद-भाव के कारण प्रताड़ित होकर भारत में आए है. इस प्रक्रिया के माध्यम से उनकी शनाख़्त की जाएगी जिसके बाद उनको भारत में शरण देकर 6 साल बाद नागरिकता दी जाएगी जिसमें केवल अल्पसंख्यक शामिल होंगे.

भारत सरकार ने आश्वासन दिया है कि CAA और NRC के कारण भारत के मुसलमानों को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला.

निष्कर्ष 


उम्मीद है आपको nrc क्या है, NRC ka full form , NRC के लिए किन डाक्यूमेंट्स की जरुरत पड़ेगी आदि के  जानकारी मिल गई होगी। इस उल्लेख के माध्यम से हमने आपको निष्पक्ष रूप से जानकारी प्रदान की. NRC को लेकर अलग-अलग समुदायों के लोगो के विचार अलग-अलग हो सकते है इसलिए इस उल्लेख का मकसद किसी को अपनी राय देना नहीं है,इसे पढ़कर आप अपनी राय खुद बना सकते है. आशा करता हूँ आपको यह जानकारी NRC क्या है, NRC ka full form आदि पसंद आई होगी।

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