उत्तराखंड में सिखों की 100 एकड़ जमीन पर प्रशासन का कब्जा, कार्यवाई में रूकावट डालने के दोष में सिखों पर मामले दर्ज़

उत्तराखंड से एक घटना सामने आई है जिसमें खटीमा तहसील के एक गाँव ऊलाणी में वहां के प्रशासन ने पुलिस की सहायता से सिख किसानों की 100 एकड़ फसल पर कब्जा कर लिया है.

झारखंड में सिखों की 100 एकड़ फसल पर गैरकानूनी प्रशासनिक करवाई
प्रशासन ने सिख किसानों की मेहनत से त्यार हुई फसल सीलिंग की भूमि बताकर कब्जे में ली है. सिखों द्वारा विरोध करने पर उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई उल्टा प्रशासन की इस करवाई का विरोध करने वाले सिखों पर प्रशासनिक कार्यवाई में रूकावट डालने के दोष में मामले दर्ज़ किए गए हैं. बताया जा रहा है कि विरोध जताने वाले 50 से भी अधिक सिख किसानों पर धारा 341,332,427,504,270 और 271 के तहत मामले दर्ज़ हुए हैं.

ऑल इंडिया सिख प्रतिनिधि बोर्ड के एक बुलारे सुखवंत सिंह का कहना है कि ऊलाणी गाँव के सिख किसानों ने वहां के तहसीलदार की मंजूरी से फसल की काश्त की थी लेकिन स्थाननीय प्रशासन ने जबरदस्ती पुलिस की सहायता से फसल अपने कब्जे में ले ली है. यह घटना होने के बाद अब स्थाननीय तहसीलदार की भूमिका भी शक के घेरे में आती है.

जमीन को लेकर विवाद क्या है? 


जमीन को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच 1972 में विवाद शुरू हुआ था. 1972 में सरकार ने जमीन को सीलिंग की जमीन बताकर खाली करने के आदेश दिए थे जिसके बाद किसानों ने कमिश्नर के पास केस किया जिसमें सिख किसान जीत गए और उनको वहां खेती करने की अनुमति मिल गई.

उसके बाद मामला हाई कोर्ट में चला गया जहाँ किसानों की तरफ से कोई वकील ना होने के कारण प्रशासन के पक्ष में फैसला आया. इसके बाद किसानों ने सुप्रीम कोर्ट में केस किया जिसका अभी तक कोई फैसला नहीं आया है लेकिन उसके बावजूद 100 एकड़ फसल पर प्रशासन ने कब्जा कर लिया है.

सिख प्रतिनिधि बोर्ड के बुलारे सुखवंत सिंह का कहना है कि कोरोना महांमारी के कारण सुप्रीम कोर्ट बंद है इसलिए पीड़त किसान इस समय गुहार नहीं लगा सकते ऐसी हालत में उन्होंने सिख जथेबंदियों को आगे आकर किसानों की मदद करने की अपील की है. इसके इलावा गुरुद्वारा नानकमत्ता का सिख प्रतिनिधि मंडल भी आगे आया है और उन्होंने सिखों के साथ हुई इस गैर-क़ानूनी कार्यवाई में श्रोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को हस्तक्शेप करने को कहा है.

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