बुखार की दवा - Bukhar ki dawa

शरीर के प्राकृतिक अथवा स्वाभाविक तापक्रम (टेम्परेचर) से अधिक ताप्रक्रम होना 'ज्वर' अर्थात बुखार का परिचायक है. स्मरण रहे कि शरीर का प्राकृतिक या स्वाभाविक तापक्रम 97.4 डिग्री फॉरेनहाइट तक रहता है. परन्तु कई स्वस्थ मनुष्यों का स्वाभाविक तापमान 96.7 से 99 डिग्री फॉरेनहाइट तक भी होता है. सामान्यत: मनुष्य का प्राकृतिक/सामान्य तापमान (नार्मल टेम्परेचर) 98.4 डिग्री फॉरेनहाइट यानि 37 डिग्री सेंटीग्रेड हुआ करता है. यह थर्मामीटर द्वारा मुख में पाया जाने वाला तापमान है. बगल, जांघों के जोड़ों का तापमान मुख के तापमान से आधा से एक डिग्री तक कम तथा गुदा का तापमान एक डिग्री अधिक होता है.

प्रत्येक स्वस्थ मनुष्य का शारीरक तापमान प्रात: समय कुछ कम और सायं के 5 बजे से 7 बजे के मध्य कुछ अधिक होता है तथा रात्रि के समय तापमान पुनः घट जाता है. 100 डिग्री फॉरेनहाइट तक के ज्वर (तापमान) को मामूली अथवा सामान्य बुखार, 102 डिग्री फॉरेनहाइट तक मध्य ज्वर 104 डिग्री फॉरेनहाइट तक के ज्वार को 'हाई फीवर' और 105 डिग्री फॉरेनहाइट अथवा इससे अधिक ज्वर को 'बहुत अधिक ज्वर' (hyper pyrexia) कहते हैं. छोटे बच्चों का तापमान अधिक एवं वृद्धवस्था के लोगों का तापमान सामान्य से कम रहने लगता है.


bukhar ki dawa
Bukhar ki dawa

यदि किसी मनुष्य का तापक्रम नार्मल टेम्परेचर से 3 डिग्री सेंटीग्रेड कम हो जाए तो रोगी पर मूर्छा (Narcosis) छा जाती है और यदि टेम्परेचर नार्मल से 3 डिग्री सेंटीग्रेड बढ़ जाए तो रोगी को प्रलाप (Delirium) यानि बेहोशी में बड़बड़ाने का रोग लग जाता है. काफी समय तक नार्मल टेम्परेचर से अधिक अथवा बहुत अधिक टेम्परेचर बने रहने से रोगी के शरीर के विभिन्न अंगों को भारी क्षति पहुँचती है.

बुखार की दवा 


बुखार का allopathy, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक, यूनानी एवं घरेलू तरीके अपनाकर उपचार किया जा सकता है. इस उल्लेख में हम इन सभी किस्म के उपचार और उनमें उपयोग होने वाली दवाओं का जिक्र करने वाले हैं.

जरुरी नोट:- सबसे पहले हम आपको बता दें कि इस पोस्ट में केवल सामान्य जानकारी के लिए बुखार की दवा के नाम बताए गए है. हमारा मकसद किसी बीमारी का इलाज बताना नहीं है आपको केवल डाक्टर की सलाह से ही दवाओं का उपयोग करना चाहिए.

बुखार की अंग्रेजी दवा 


संक्रमण को रोकने के लिए प्रतिजीवी औषधि यानि Antibiotics तथा ज्वर दूर करने के लिए ज्वरनाशक (Antipyretic) एवं साथ ही विटामिन बी काम्प्लेक्स (Vitamin B complex) का रोगी को सेवन कराएं.

1. टेबलेट पेरासिटामोल (Paracetamol) (पेटेंट व्यावसायिक नाम क्रोसिन, कालपोल, मैलीडेंस आदि जो टेबलेट या पेय के रूप में बाज़ार में उपलब्ध हैं) 500 मिलीग्राम दिन में तीन बार आवश्यकतानुसार व्यसकों को सेवन कराएं.

2. कैप्सूल टैरामायसिन या एमौक्सीसिलीन अथवा सिफ्रोफ्लोक्सिन आदि 250 मिलीग्राम की परिमात्रा में दिन में दो-तीन बार आवश्कयतानुसार सेवन कराएं. यही दवा बच्चों के लिए (KID) किकिया व पेय के रूप में उपलब्ध है. रोग की तीव्रता में 'जेंटामाईसिन' इंजेक्शन का आवश्यकतानुसार प्रयोग किया जा सकता है.

3. कैप्सूल बीकोसूल्स दिन में आवकश्यतानुसार प्रातः समय नाश्ते के उपरांत तथा रात्रि को सोते समय भोजन के बाद 1 या 2 बार. इसका पेय (syrup) भी बच्चों व वयस्कों के लिए प्रयोग हेतु बाज़ार में उपलब्ध है.

4. यदि सारे शरीर में अथवा कहीं भी दर्द हो तो टेबलेट एस्प्रिन (Asprin) का सेवन कराएं.

बुखार के लिए कुछ अन्य उपयोगी औषधियां 


1. अक्रेडिन (Acredin) निर्माता साराभाई:- यह 'फामोटीडीन' का योग है जो डूडेनल अल्सर, गैस्ट्रिक अल्सर, पेप्टिक अल्सर, अजीर्ण, अफारा आदि में उपयोगी है. 20 मिलीग्राम दिन में दो बार भोजनोपरांत दें.

सावधानी:- संवेदनशीलता, गैस्ट्रिक कार्सीनोमा, गर्भवस्था तथा दूध पिलानी वाली माताओं को सेवन ना कराएं.

2. एरीथ्रोसिन एफ.टी टेबलेट निर्माता अब्बोट:-  यह एरिथ्रोमाइसिन का पेटेंट योग है. जो काली खांसी, कुकुर खांसी (Hooping cough), गले के विकार, टांसिल, फैरीनजाईटिस, सर्दी, जुकाम, नजला, सैप्टी -सिमिया, रक्त विषयमयता, श्वसन संक्रमण के जटिल संक्रमण, श्वास नली का प्रदाह, ब्रोंकाइटिस, जननांगो के रोग, कारबंकल फोडा व घाव आदि में उपयोगी है.

सावधानी:- संवेदनशीलता, एलर्जी, पीलिया, रक्तहीनता, गर्भवस्था तथा शिशुओं को दुग्धपान कराने वाली माताओं को सेवन ना कराएं.

3. कोरफलाम टेबलेट (Corflam) निर्माता कोर.यह आईबोप्रोफेन+पैरासिटामोल का पेटेंट योग है जो जोड़ों की वेदना, मांसपेशियों की वेदना, सर्दी, जुकाम, हरारत, दर्दयुक्त शोध, चोट, मोच, वायरस के विकार, पीठ का दर्द, पीठ की जकड़न आदि में उपयोगी है. वयस्कों को एक-दो गोलियां दिन में तीन बार अथवा आवश्यकतानुसार दें.

सावधानी:- पेप्टिक अल्सर, गर्भावस्था तथा एलर्जी में ना दें.

बुखार की आयुर्वेदिक दवा 


बुखार की प्रमुख आयुर्वेदिक चिकित्सा के प्रयोग

1. त्रिभुवन कीर्ति रस:- 125 मिलीग्राम (वयस्कों को) दिन में दो-तीन बार, तुलसी+बिल्व पत्र फांट के अनुपान से दें. वातज व कफज ज्वार में उपयोगी है.

2. ज्वर संहार रस:- 125 से 250 मिलीग्राम तक दिन में तीन बार गोजिहादि क्वाथ के अनुपान से सेवन कराएं. वातज व कफज ज्वर में लाभदायक है.

3. कस्तूरी भैरव रस:- 125 मिलीग्राम दिन में 2-3 बार ताम्बूल (पान) के स्वरस के अनुपान से दें. यह भी वातज व खांसी वाले बुखार में लाभकारी है.

4. ज्वराकुंश रस:- 250 मिलीग्राम दिन में दो तीन बार पान के पत्ते के स्वरस के अनुपान से सेवन कराएं. वात एवं कफ ज्वर में उपयोगी है.

5. हिंगुलेश्वर रस:- 125 मिलीग्राम दिन में दो बार शहद के अनुपान से दें. वातिक बुखार में लाभकारी है.

6. मृत्युंजय रस:- 125 से 250 मिलीग्राम दिन में दो बार शहद के अनुपान से दें. वात व कफ दोनों किस्म के बुखार के लिए उपयोगी है.

7. आनंद भैरव रस:- मात्रा, अनुपान व उपयोग उपरोक्त विवेचित औषधि की ही भांति है.

8. जयमंगल रस:- 125 मिलीग्राम दिन में दो बार जीरक+मधु के अनुपान से सेवन कराएं. जीर्ण ज्वर में उपयोगी है.

9. चंद्र कला रस:- 125 मिलीग्राम दिन में दो बार पटोलपत्र स्वरस+मधु के अनुपान के साथ सेवन कराएं. पित्तज ज्वर में विशेष उपयोगी है.

10. कल्पतरु रस:- यह भी 125 मिलीग्राम दिन में 2 बार अदरक स्वरस+मधु के अनुपान के साथ दें.कफज ज्वर में विशेष उपयोगी है.

11. कामदुधा रस:- 125 मिलीग्राम दिन में दो बार गुलबंद के अनुपान से दें. पित्तज ज्वर में लाभकारी है.

12. हरगौरी रस:- 250 मिलीग्राम दिन में दो बार पिप्पली तथा मधु के अनुपान के साथ सेवन कराएं. वातज ज्वर में विशेष उपयोगी है.

13. गोदंती भस्म 500 मि.ग्रा. तथा जहर मोरा पिष्टी+रसादि वटी प्रत्येक 250-250 मि.ग्रा.= 1 मात्रा. तापमान कम करने के लिए लाभकारी योग है.

बुखार की यूनानी दवा 


यूनानी इलाज पद्धति में बुखार के लिए निम्नलिखित दवाएं उपयोग की जाती है

कुर्स मुबारक:- यदि ज्वर जाड़ा लगने और पसीने के साथ हो या बिना किसी चिन्ह या लक्षण के साथ हो तो आवकश्यतानुसार सेवन कराएं. वयस्कों को 3 टिकियाँ दिन में 3 बार जल के साथ दें.

कुर्स शिफा:- यदि ज्वर के साथ सिरदर्द हो तो आवकश्यतानुसार दें. टिकिया दिन में दो बार वयस्कों को सेवन कराएं.

त्रिफला चूर्ण (निर्माता हमदर्द दवाखाना):- बुखार, मलेरिया ज्वर, रक्त विकार तथा कोड़ आदि में उपयोगी है. दो से तीन बार दिन में 1-2 बार आवकश्यतानुसार उचित अनुपान के साथ सेवन कराएं.

बुखार की दवा होम्योपैथिक 


1. ब्रायोनियां 6:- सर्दी के कारण उत्पन्न बुखार, छाती, हाथ-पाँव तथा पीठ में अत्यधिक दर्द के लक्षणों में दिन में 3 बार सेवन कराएं. 

2. आर्सेनिक 30:- ठंडा बांसी खाना खाने या खराब पानी पीने के कारण बुखार होना, बेचैनी, थोड़ा-थोड़ा पानी पीने की जल्दी इच्छा होना आदि लक्षणों में 3-3 घंटे के अंतराल से दें.

3. जेल्सीमियम 30:- बुखार में पसीना व प्यास का अभाव, तंद्रालुता, चुपचाप लेटे रहने की इच्छा, मूत्र त्याग के उपरांत रोग वृद्धि आदि लक्षणों में रोगी को 3-3 घंटे के अंतर से सेवन कराएं.

4. रसटास्क 6:- यदि पानी में भीग जाने के कारण अथवा बरसात की ठंडी हवा लगने के कारण बुखार आया हो, सम्पूर्ण शरीर एवं कमर में दर्द भी हो तो दिन में 4 बार सेवन कराएं.

5. बेलाडोना 30:- सुखी, ठंडी हवा लगने के कारण उत्पन्न ज्वर साथ ही सिर में दर्द तथा आँखों में लालिमा के लक्षणों में दिन में दो-तीन बार दें.

6. एकोनाइट 30:- सुखी ठंडी हवा लगने के कारण ज्वर, तीव्र प्यास, बेचैनी तथा मृत्यु भय आदि लक्षणों में दिन में तीन बार दें.

7. पल्सेटिला 30:- यदि अधिक खाने पीने अथवा स्नानोपरांत बुखार आया हो तथा प्यास बिलकुल ना हो तो दिन में 4 बार सेवन करें.

8. डल्कामारा 30:- ज्वर के साथ तीव्र वमन व मिचली (vomiting) के लक्षण होने पर 1-1 घंटे के अंतराल से सेवन कराना बुखार के मरीज़ के लिए हितकारी है.

बुखार की दवा घरेलू 


आक की जड़ की छाल 2 माशा और काली मिर्च 1 माशा को लेकर बकरी के दूध में पीसकर चने के आकार की गोलियां बनाकर सुरक्षित रख लें. ज्वर आने के 1 घंटा पूर्व यह एक गोली सेवन करने से ज्वर नहीं आता है. इसके इलावा बुखार की घरेलू दवा के उपयोग इस प्रकार है-

1. नौशादर एक रत्ती और काली मिर्च एक नग या एक दाने को पीसकर गर्म जल के साथ ज्वर आने से 1 घंटा पूर्व सेवन करने से ज्वर नहीं आता है.

2. एक माशा कायफल को पीस-छानकर ज्वर आने के पूर्व सेवन कर लेने से ज्वर नहीं आता है.

3. अतिश 2 से 4 माशा तक का चूर्ण बनाकर सेवन करने से ज्वर उतर जाता है.

4. खिरैंटी की जड़ गले में बाँधने से ज्वर उतर जाता है.

5. तुलसी के पत्ते 8 नग के साथ काली मिर्च 3 नग पीसकर रस निकालकर सेवन करने से साधारण ज्वर उतर जाता है.

6. पान का रस, अदरक का रस और शहद प्रत्येक 6-6 माशा मिलाकर प्रातः सायं सेवन करने से बुखार शीघ्र ही उतर जाता है.

7. आक की जड़ की छाल ढाई रत्ती खाने से पसीना आकार साधारण बुखार उतर जाता है.

8. तुलसी के पत्ते और काली मिर्च 20-20 नग, अदरक 9 माशा, दालचीनी 2 माशा को 60 मि.ली. जल में उबालकर 25 ग्राम मिश्री अथवा शक्कर मिलाकर गर्म-गर्म ही दिन में 2-3 बार सेवन करने से सामान्य ज्वर दूर हो जाता है.

9. कुटकी, सौंठ, खश, नागर मोथा और धमाशा प्रत्येक ओषधि को सामान मात्रा में लेकर एवं एवं कूटकर (दरदरा कूटकर) 360 मि.ली जल में क्वाथ करें. जब पानी एक चौथाई (90 मि.ली) शेष बचे तब उतार छानकर पीने से ज्वर उतर जाता है.

10. लगे हुए पान में तीन रत्ती कपूर रखकर खाने से पसीना आने से ज्वर उतर जाता है.

निष्कर्ष 


बुखार की वजह से शरीर में निरंतर गर्मी की अधिकता बनी रहने से रक्त तथा शरीर का तरल सूख जाता है. शरीर के तंतु व धातु (Tissues) और सेलों में गर्मी की अधिकता से शोथ हो जाती है. 40 डिग्री सेंटीग्रेड अर्थात 104 डिग्री फॉरेनहाइट ज्वर काफी समय तक रहने से मांसपेशियों की प्रोटीन का तरल खुशक हो जाने की वजह से वो गाढ़ी हो जाती हैं.

गर्मी की अधिकता से हृदय की मांसपेशियां और उनसे सम्बंधित मस्तिष्क की स्नायु (Nerves) कमज़ोर हो जाती हैं. बुखार की गर्मी बढ़ने से हृदय (हार्ट) व नाड़ी (Pulse) की गति बढ़ने लगती है. इसलिए बिना देरी किए इसका इलाज करवाना चाहिए. डाक्टर की सलाह से आप बुखार की दवा का उपयोग कर सकते हैं. 

Post a Comment

0 Comments