CAB का फुल फॉर्म - CAB ka full form

सरकार द्वारा विधान सभा में जब CAB पेश किया गया तब से यह बिल विवाद का विषय बना हुआ है. विपक्षी पार्टी कांग्रेस के अनुसार यह बिल भारतीय संविधान की मूल भावना के साथ खिलवाड़ एवं मुस्लिम समुदाय के खिलाफ़ है. देश के बहुत बड़े हिस्से में इसको लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए इसलिए CAB के बारे में हर भारतीय को जानकारी होना आवश्यक है.

CAB ka full form
CAB ka full form 

इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको CAB से जुड़े कुछ अहम तथ्य बताने जा रहे है जैसे कि CAB क्या है, CAB का फुल फॉर्म क्या है, CAB सर्वप्रथम कब पेश किया गया, इस क़ानून के अंतर्गत किस-किस को नागरिकता मिलेगी और CAB कहाँ लागू नहीं होगा? ? जिससे आपको CAB के बारे में अच्छे से जानकारी हो जाएगी.

CAB ka full form 


अंग्रेजी भाषा में CAB का फुल फॉर्म "Citizenship amendment bill" होता है जिसको हिंदी में "नागरिकता संशोधन विधेयक" कहा जाता है.

CAB 11 दिसम्बर, 2019 के दिन राज्य सभा में पास हुआ. इसके पक्ष में 125 और विरोध में 105 वोट पड़े. इससे पहले ग्रह मंत्री अमित शाह ने यह बिल 9 दिसम्बर, 2019 के दिन लोक सभा में पेश किया. लोक सभा में इस बिल के पक्ष में 311 और विरोध में 80 वोट पड़े. लोक सभा और राज्य सभा में बिल पास होने के बाद अब इसको राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है जिसके बाद अब यह बिल कानून में बदल चुका है जिसको CAA का नाम दिया गया है.

जब भी सरकार किसी कानून में बदलाव करती है तो सबसे पहले वो प्रस्ताव के रूप में लोक सभा में पेश किया जाता है जब उस प्रस्ताव को लोक सभा और राज्य सभा से मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाए तो वो कानून बन जाता है. इसलिए CAB को ही इस वक्त CAA की शक्ल दी गई है.

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CAB क्या है


CAB अर्थात नागरिकता संशोधन विधेयक में पुराने नागरिकता कानून 1955 में बदलाव करके कुछ नए नियम बनाए गए हैं जिनके अंतर्गत अवैध प्रवासियों को नागरिकता देने का प्रावधान रखा गया है.

नागरिकता संशोधन विधेयक के अनुसार भारत के तीन पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक रूप से प्रताड़ित होकर भारत में गैर-कानूनी ढंग से रह रहे हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान रखा गया है. गौरतलब है कि यदि अवैध प्रवासी मुस्लमान पाया जाता है तो उसको नए नियमों के अनुसार नागरिकता नहीं दी जाएगी.

पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक जो अवैध ढंग से भारत में रह रहें है उनके लिए नागरिकता प्रदान करने की अवधि को घटाकर 1-6 साल कर दिया गया है. इससे पहले अवैध प्रवासी को 11 साल भारत में रहने के बाद नागरिकता दी जाती थी.

नागरिकता संशोधन एक्ट के तहत OCI अर्थात Overseas citizen of India अगर किसी कानून की उलंघना करता है तो उसकी रजिस्ट्रेशन कैंसल हो सकती है. पुराने नागरिकता कानून 1955 के तहत भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को रजिस्ट्रेशन के माध्यम से भारत में घूमने, पढ़ने और काम करने का अधिकार मिलता है. अब नए नियमों के लागू होने और उनकी उलंघना करने के बाद उनकी रजिस्ट्रेशन खारिज़ हो सकती है.

CAB सर्वप्रथम कब पेश किया गया? 


सर्वप्रथम जनवरी, 2019 को बीजेपी सरकार ने इस बिल को कानून में बदलने की कोशिश की थी. 8 जनवरी, 2019 को CAB लोक सभा में पास हो गया था लेकिन 16 विधान सभा का कार्यकाल ख़तम होने की वजह से यह बिल खारिज हो गया था. अब दोबारा सरकार बनने के बाद बीजेपी ने लोक सभा और विधान सभा से यह बिल पास करवाकर इसको कानून बना दिया है.

CAB कहाँ लागू नहीं होगा? 


CAB के प्रावधान संविधान की छठी अनुसूची में शामिल राज्यों में लागू नहीं होंगे. छठी अनुसूची में असम, मिजोरम और त्रिपुरा के आदिवादी इलाकों में लागू नहीं होंगे. छठी अनुसूची में शामिल राज्यों को ADC (Autonomous District Council) के विशेष अधिकार मिले हुए है. ADC आदिवादी इलाकों के विकास जैसे उदेश्यों के लिए अपने कार्यक्षेत्र में खुद कानून बना सकते है.

अवैध नागरिकों की पहचान कैसे होगी? 


भारत के ग्रह मंत्री अमित शाह ने लोक सभा में कहा है कि अवैध नागरिकों की पहचान करने के लिए सरकार पूरे देश में एनआरसी करवाएगी जिससे अवैध नागरिकों का पता लगाया जाएगा. एनआरसी सरकार द्वारा करवाई जाने वाली वो प्रक्रिया है जिसके माध्यम से लोगों को सरकार द्वारा निर्देशित दस्तावेज़ दिखाकर अपनी नागरिकता साबित करनी पड़ती है.

इससे पहले बांग्लादेश से असम में घुसे अवैध नागरिकों की पहचान करने के लिए सरकार असम में एनआरसी करवा चुकी है अब पूरे भारत में होने वाली एनआरसी में लोगों को साबित करना होगा कि वो या उनके पूर्वज 1951 के पहले से भारत में रहते थे. इसके लिए लोगों को अपनी किसी जायदाद के दस्तावेज़ दिखाने पड़ सकते है. पासपोर्ट, आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर कार्ड आदि मान्य नहीं होंगे.

अवैध नागरिकों का क्या होगा? 


एनआरसी की प्रक्रिया में जो भी व्यक्ति अपनी नागरिकता साबित ना कर पाया तो उसको तुरंत अवैध नागरिक या घुसपैठिया घोषित कर दिया जाएगा जिसके बाद उसको जेल या detention सेंटर में रहना पड़ सकता है. इसके बाद अवैध नागरिक पाए जाने वाले नागरिक तो भारत की नागरिकता साबित करने के लिए 3 महीने का समय दिया जाएगा. अगर वो अपनी नागरिकता नहीं साबित कर पाता तो उसको अपने देश वापिस भेज दिया जाएगा.

निष्कर्ष 


उम्मीद है आपको CAB का फुल फॉर्म के साथ इससे जुडी अन्य जानकारी भी मिल गई होगी। सरलता से समझा जाए तो इस कानून के अंतर्गत भारत के पडोसी मुस्लिम बहुसंख्यक देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक रूप से प्रताड़ित होकर भारत में रह रहे हिन्दू,सिख,बौद्ध,जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता प्राप्त करने में आसानी होगी लेकिन अगर कोई मुस्लमान अवैध नागरिक पाया जाता है तो उसको नागरिकता नहीं मिलेगी।

नए नागरिकता कानून को लेकर अब विवाद यही बना हुआ है कि अगर भारत के मुस्लमान अपनी नागरिकता साबित न कर पाए तो उनका क्या होगा?

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