भारत के कुछ अस्पतालों ने मुसलमानों को भर्ती करने पर लगाई रोक, इश्तिहार देकर की घोषणा

झारखंड और राजस्थान से दो मामले सामने आए है जिनमें दो गर्भवती औरतों को अस्पताल में मुस्लमान होने की वजह से भर्ती नहीं किया गया जिसके परिणामस्वरूप दो नवजात शिशुओं की मौत हो गई.

राजस्थान के भरतपुर में गर्भवती महिला को अस्पताल से निकाला, नवजात की हुई मौत 

तेलंगाना में कई अस्पतालों ने मुसलमानों को भर्ती करने पर प्रतिबन्ध लगा दिया है. वहीं उत्तर-प्रदेश के मेरठ शहर में स्थित एक अस्पताल ने इश्तिहार निकाल कर घोषणा की है कि वो केवल उन्हीं मुसलमानों को भर्ती करेंगे जिनका Covid-19 टेस्ट नेगेटिव होगा लेकिन हिन्दुओं को इलाज के लिए पहचान पत्र भी ना दिखाने की छूट दी गई है.

जब से भारत में लॉकडाउन की शुरुआत हुई है तब से भारतीय मिडिया द्वारा मुसलमानों को लेकर प्रोपेगंडा चलाया जा रहा है कि मुसलमान भारत में कोरोना फैलाने की योजना बना रहे है. लोगों में मिडिया द्वारा पैदा किए गए islamophobia के नतीजे अब भारत के कई क्षेत्रों में सामने आने लगे है.

झारखंड की घटना 


पहली घटना झारखंड के जमशेदपुर से है जहाँ एक मुस्लिम महिला का गर्भपात हो गया क्योंकि एमजीएम हॉस्पिटल ने उसका इलाज करने से मना कर दिया.

रिजवाना खातून नामक 30 वर्षीय महिला का जब खून बहने लगा तो उसको अस्पताल लाया गया लेकिन अस्पताल में उसपर कोरोना वायरस फैलाने का इलज़ाम लगाकर पहले उसको पीटा गया और खून भी साफ करने को कहा गया.

राजस्थान की घटना 


दूसरा मामला राजस्थान के जिला भरतपुर से सामने आया है जहाँ कुछ दिन पहले प्रवीना नामक मुस्लिम महिला को स्थानीय सरकारी अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया जिसके बाद उसके परिजन उसको प्राइवेट अस्पातल ले गए लेकिन रास्ते में ही महिला की डिलीवरी हो गई और नवजात शिशु मृत्यु की भेंट चढ़ गया.

इसी तरह तेलंगाना के कई अस्पतालों ने मुसलमानों को भर्ती करने पर रोग लगाई है वहीं उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित एक अस्पताल में मिसलमानों को Covid-19 टेस्ट नेगेटिव होने की शर्त पर ही भर्ती करने की घोषणा की है.

भारत के कई क्षेत्रों से खबरें आ रही है जिनमें मुसलमान बता रहे है कि उनको फार्मेसी की दुकानों द्वारा दवाई भी नहीं दी जा रही ना ही उसको अस्पतालों में इलाज के भर्ती किया जा रहा है.

भारत को एक लोकतान्त्रिक देश कहा जाता है लेकिन पिछले कुछ समय से देश में धार्मिक भेद-भाव लगातार बढ़ता जा रहा है. ऐसी नफ़रत ने तब से तूल पकड़ा है जबसे बीजेपी सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन कानून लागू किया गया है. तब से मिडिया द्वारा भी मुसलमानों के खिलाफ़ एक मुहीम चलाई जा रही है जिसकी वजह से मुस्लमान आज की तारीख में लोगों की नफ़रत के पत्र बन गए हैं.

लेकिन अब हुई घटनाओं का जिम्मेदार कुछ दिन पहले नई दिल्ली में तब्लीगियों की हुई एकत्रता को कहा जा सकता है जिसको भारतीय मिडिया ने मुसलमानों के खिलाफ़ मुद्दा बनाकर कोरोना वायरस फैलाने का जिम्मेदार ठहराया.

लेकिन दूसरी तरफ आरएसएस द्वारा अपने शिविरों में हज़ारों की एकत्रता करने की खबरें आई, एक सभा का उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने खुद आयोजन किया लेकिन मिडिया ने उसको मुद्दा नहीं बनाया.  

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