खांसी की दवा - Khansi ki dawa

आयुर्वेद में एक कहावत मशहूर है कि 'लड़ाई की जड़ हांसी और मर्जों की जड़ खांसी'. अतः यदि खांसी लंबे समय तक यानि बहुत दिनों तक बनी रहे तो यह अन्य किसी विशेष रोग का लक्षण है. इसलिए इसके 'मूल कारण' (ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, कार्डियक अस्थमा, टी.बी आदि) की किसी सुयोग्य परीक्षित चिकित्सक अथवा राजकीय चिकित्सालयों के चिकित्सको से शीघ्र ही जाँच व समुचित चिकित्सा का प्रबंध करना चाहिए. यह पोस्ट लिखने का मकसद आपको इस रोग से परिचित करवाना है इसलिए इस उल्लेख में हमनें खांसी के कारण, खांसी क्या है और खांसी की दवा के बारे में बताया है.

Khansi ki dawa
Khansi ki dawa


खांसी क्या है? 


खांसी का रोग श्वसन संस्थान (Respiratory tract) के संक्रमण के कारण उत्पन्न होता है जिसके बाद व्यक्ति में खांसने के लक्षण दिखाई देने लगते है. सत्यता तो यह है कि श्वसन मार्ग में फंसे हुए विजातीय (मल) पदार्थ को बाहर निकालने की प्राकृतिक क्रिया को 'खांसी' कहते है. इस क्रिया के माध्यम से शरीर छाती में जमा हुए मल को बाहर निकालता है.

खांसी के कारण 


1. अधिकतर मामलों में श्वास नली या गले में बैक्टीरियल संक्रमण होने के कारण खांसी का रोग उत्पन्न होता है.

2. खांसी का रोग अन्य किसी दूसरे रोगों के लक्षणस्वरूप या किसी वस्तु के प्रति एलर्जी के कारण अथवा धूल के कण या धुए का श्वास नली में प्रवेश कर जाने के कारण भी होता है.

3. इसके अतिरिक्त प्रदूषित वातावरण का रहन-सहन रुक्ष पदार्थों का सेवन भी इस रोग को उत्पन्न करने का प्रमुख कारण बनता है.

खांसी के प्रकार 


साधारण खांसी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है--

1. सूखी खांसी 

2. बलगम वाली खांसी 

1. सूखी खांसी:- सूखी खांसी थोड़ी देर अथवा लंबे समय तक चलने के बाद रूकती है. इस किस्म की खांसी में बलगम (mucus) नहीं निकालता. इसमें श्वसन नली में दर्द, सूजन एवं जलन पैदा होती है.

2. बलगम वाली खांसी:- बलगम वाली खांसी या कफयुक्त खांसी में छाती से बलगम निकलती है और यह खांसी तब तक चलती है जब तक कफ यानि बलगम बाहर नहीं निकलता.

खांसी की दवा 


खांसी का इलाज सभी किस्म की औषदि पद्धतियों में मौजूद है. इस उल्लेख में सामान्य जानकारी के लिए खांसी की एलोपैथिक, आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक एवं यूनानी दवा के बारे में बताया गया है लेकिन हमारी आपसे यही सलाह है कि यदि आपको खांसी की शिकायत है तो आप केवल डॉक्टर की सलाह से ही दवा लें. 

इस पोस्ट में कुछ उपयोगी घरेलू नुस्खों का भी वर्णन किया गया है वो अवश्य आपके लिए कारगर सिद्ध हो सकते हैं जिन्हें कोई भी अपना सकता है.

खांसी की अंग्रेजी दवा 


एलोपैथी पद्धति में खांसी की दवा मौजूद है प्रभावशाली ढंग से बहुत जल्दी खांसी पर नियंत्रण करके खांसी और संक्रमण को मिटाती है. इसमें खांसी के ईलाज के लिए मुख्य रूप से दो तरह की दवाओं का उपयोग किया जाता है-

1. एंटीबायोटिक 

2. एंटी एलर्जिक 

1. एंटीबायोटिक:- खांसी में एंटीबायोटिक (antibiotic) औषदियां जैसे कि ऑक्सीटेट्रासाईक्लीन (व्यावसायिक नाम टैरामाईसिन) क्लोरम्फेनिकोल (व्यावसायिक नाम क्लोरो मायसेटिन, पाराक्सीन), एमौक्सीसीलीन, एम्पीसिलिन, क्लोक्सासिलिन आदि का आवश्यकतानुसार उचित मात्रा में दवा निर्माता का दवा के साथ प्राप्त साहित्य को भली प्रकार पढ़कर तथा उसके निर्देशों का पालन करते हुए रोगी को सेवन कराए जाने का प्रावधान है.

इसके अतिरिक्त साथ में कोई एक कफ सिरप जैसे कोरेक्स, बेनाड्रिल, ग्लायकोडिन, टोसेक्स आदि का आयु अनुसार तथा रोग की दशानुसार सेवन कराया जाता है.

खांसी के ईलाज के लिए प्रयोग किए जाने वाले कुछ एंटीबायोटिक्स इस प्रकार है-

टेरामाइसिन एस.एफ कैप्सूल:- इस कैप्सूल की निर्माता फाइजर कंपनी है. यह ऑक्सी टेट्रा साइक्लिन से निर्मित कैप्सूल है जिसमें विटामिन बी कॉम्प्लेक्स का योग भी सम्मिलित है. इस एंटीबायोटिक दवा के प्रयोग से कई किस्म के कीटाणुओं के संक्रमण से उत्पन्न रोग नियंत्रित होकर दूर हो जाते है. यह कैप्सूल 6-6 घंटे के अंतराल में 1-1 कैप्सूल वयस्कों को सेवन कराया जाता है.

नोवामोक्स कैप्सूल:- इस कैप्सूल का निर्माण सिप्लामेड फार्मास्यूटिकल कंपनी द्वारा किया जाता है. यह कैप्सूल अमोक्सीसिलिन पदार्थ (salt) से निर्मित है. यह गले के संक्रमण जिससे खांसी उत्पन्न होती है उसके एलावा शरीर में पैदा होने वाले अन्य संक्रमणों में भी बहुत है. बलगम वाली खांसी में यह खास प्रभावशाली साबित होता है क्योंकि यह बलगम को समाप्त करने में सहायता करता है.

2. एंटी एलर्जिक (हिस्टामिन):- औषदि जैसे कि एविल का आवकश्यतानुसार प्रयोग किया जाना बहुत लाभदायक सिद्ध होता है. यह एक एंटी एलर्जिक है जो केवल डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन पर ही मिलती है. इसके एलावा कुछ कफ सिरप जो कि एंटी एलर्जिक होती है उसका भी प्रयोग किया जाता है. खांसी में उपयोगी कुछ कफ सिरप इस प्रकार है-

कोरेक्स कफ सिरप:- इस कफ सिरप की निर्माता फाइजर फार्मास्यूटिकल कंपनी है. यह दवा खांसी को दूर करने के लिए उत्तम मानी जाती है.काली खांसी, खुश्क खांसी, एलर्जिक खांसी, ऐंठन की खांसी एवं प्रत्येक प्रकार की खांसी न्यूमोनिया, इन्फ्लुएंजा, ब्रोंकाइटिस तथा शयरोग की कष्टदायक खांसी में लाभदायक है. वयस्कों को 1-2 चम्मच दवा प्रतिदिन 4 बार तथा बच्चों को आधा चम्मच 3-4 बार प्रतिदिन प्रयोग कराए.

बेनाड्रिल:- यह दवा कैप्सूल, कफ सीरप तथा एक्सपेक्टरेंट के रूप में बाज़ार में उपलब्ध है. यह एक प्रबल शक्तिशाली 'एंटी हिस्टामिन' दवा है. इस दवा के पदार्थ (salt) का नाम डाईफेन हाईड्रामीन हाइड्रोक्लोराइड है. यह दवा प्रत्येक प्रकार की ऐलर्जी को (चाहे वो किसी कारण से हो) दूर करती है.

पित्ती उछलना, नाक से पानी बहना, छिकों का आना, एलर्जिक दमा, दवाओं तथा भोजनों से उत्पन्न हुई ऐलर्जी और कष्ट आदि इसके प्रयोग से दूर हो जाते है. कैप्सूल 25 व 50 मि.ग्रा के तथा खांसी को दूर करने के लिए सीरप व एक्सपेक्टरेंट 114 व 456 मि.ली की शीशियों में बाज़ार में उपलब्ध है. कैप्सूल आवश्कयतानुसार तथा सीरप 1-2 चम्मच तक प्रतिदिन 2-3 बार दिया जाता है.

टोसेक्स कफ सीरप:- खांसी की इस दवा की निर्माण साराभाई कंपनी द्वारा किया जाता है. यह सीरप प्रत्येक प्रकार की खांसी खुश्क खांसी, खराश से होने वाली खांसी, वायु प्रणाली में शोथ, न्यूमोनिया, इन्फ़्लुएन्ज़ा, क्षयरोग की खांसी आदि को दूर करती है. व्यसक रोगियों के यह दवा 1-1 चम्मच प्रतिदिन 3-4 बार आवश्यतानुसार सेवन कराई जाती है.

खांसी की दवा आयुर्वेदिक 


आयुर्वेद में कारगर खांसी की दवा मौजूद है जिससे रोग को जड़ से मिटाया जा सकता है। खांसी नाशक कुछ शास्त्रोक्त आयुर्वेदिक योग इस प्रकार हैं-

1. चंद्रामृत रस:- यह 125 मि.ग्रा दिन में 2-3 बार कंटकारी क्वाथ के अनुपान से सेवन कराया जाता है. यह वात-कफज खांसी की विशेष उपयोगी औषधि है.

2. लक्ष्मीविलास रस:- यह भी 125 मि.ग्रा दिन में 2-3 बार आर्द्रक स्वरस के अनुपान से सेवन कराया जाता है. यह खांसी में उपयोग होने वाली लाभकारी औषधि है.

3. श्रंगाराभ्र रस:- यह 125 मि.ग्रा दिन में 2-3 बार अदरक स्वरसमाधु के अनुपान से सेवन कराया जाता है.

इसके एलावा बसंत तिलक रस, श्वासकास चिंतामणि रस, अग्निरस, लोकनाथ रस, समीर पन्नाग रस उपरोक्त बताई गई मात्रा में अदरक स्वरसमधु के अनुपान से सेवन कराने के खांसी का रोग ठीक हो जाता है.

4. समशर्कर लौह:- 500 मि.ग्रा दिन में 2-3 बार आज़ाददुग्ध के साथ सेवन कराया जाता है. वात-कफज कास में विशेष उपयोगी है.

5. ताप्यादि लौह:- यह 250 मि.ग्रा. दिन में 2-3 बार मधु (शहद) के अनुपान से सेवन कराना चाहिए. यह भी वातज कफज को ठीक करने के लिए लाभदायक औषधि है.

6. अभ्रक भस्म:- 125 मि.ग्रा. दिन में 2-3 बार मधु+वातास्वरस के अनुपान से सेवन कराए. यह सूखी खांसी के लिए बहुत उपयोगी औषधि है.

7. वज्र भस्म:- यह 4-8 मि.ग्रा दिन में 2-3 बार अदरक+स्वरस मधु के अनुपान से सेवन कराया जाता है.

8. कासकर्तीरी वटी:- इसकी सभी प्रकार की खांसी को नियंत्रण करने के लिए 1-2 गोलियां दिन में 2 बार गोजिह्वादि के अनुपान से सेवन कराई जाती है. सभी प्रकार की खांसी के लिए यह एक उपयोगी औषधि है. 

खांसी की प्रमुख आयुर्वेदिक दवाएं 


खांसी के ईलाज के लिए उपयोग होने वाली आयुर्वेदिक दवाई गोलियों (tablets) और सीरप के रूप में उपलब्ध हैं. कुछ विशेष उपयोगी खांसी की दवा के बारे में नीचे वर्णन किया गया है.

1. कासहरवटी:- इस औषधि के निर्माता धंवंतरि कार्यालय अलीगढ़ है. 2-2 गोलियां दिन में 3 बार वयस्कों को तथा बच्चों को 1-1 गोली दिन में 5-6 बार चूसने हेतु निर्देशित की जाती है. यह औषधि जमे हुए कफ को पतला करके निकालती है तथा खांसी को दूर करती है.

2. कसारि सीरप:- इस सीरप का निर्माता भी धंवंतरि कार्यालय है. 1-2 चम्मच दवा आधा कप गर्म जल में डालकर दिन में 2-3 बार सेवन कराने से अथवा खांसी उठने पर ऐसे ही बिना जल मिलाए सेवन करने से खांसी से राहत मिलती है. यह समस्त प्रकार की खांसी की ख्याति प्राप्त औषधि है.

3. डी.कफ (पेय):- इसका निर्माण देवेंद्र आयुर्वेदिक आश्रम द्वारा किया गया है. यह प्रत्येक प्रकार की खांसी, नज़ला जुकाम, कंठनली व स्वनली प्रदाह, कंठ तथा फेफड़ों से सम्बंधित खांसी में गुणकारी है. 2 मि.ली से 9 मि.ली यानि आधा चाय वाला चम्मच से 2 चम्मच तक आयुनुसार दिन में 2-3 बार प्रतिदिन सेवन कराया जाता है.

विशेष:- इस औषधि को सामान मात्रा में गर्म जल तथा चाय में मिलाकर सेवन करने से शीघ्र लाभ होता है.

खांसी की दवा घरेलू 


खांसी का घरेलू नुस्खे अपनाकर भी सरल तरीके से उपचार किया जा सकता है. कुछ प्रभावशाली नुस्खे इस प्रकार है

1. अकरकरा का महीन चूर्ण 4 रत्ती समान मात्रा में मिश्री मिलाकर गुनगुने जल में दिन में 2-3 बार सेवन करने अथवा अकरकरा चूर्ण में समान भाग मुलहठी मिलाकर तथा शहद के साथ खरल करके 2-2 ग्राम की गोलियां बनाकर दिन में 4-6 बार रोगी को चुसवाने से खांसी से राहत महसूस होती है.

2. मुनक्का 5 नग, सुहागा (टंकण भस्म) डेढ़ रत्ती, काली मिर्च 4 नग और सेंधा नमक 1 ग्राम लेकर इन सभी की चटनी बनाकर रोगी को चटाने से खांसी व कफ में लाभ होता है.

3. साधारण प्रकार की खांसी में अदरक का रस निकालकर तथा उसमें थोड़ा सा शहद व काला नमक मिलाकर चाटने से खांसी से राहत मिलती है.

4. आंवला चूर्ण 20 ग्राम, दूध 125 मि.ली और जल 400 मि.ली का मिश्रण बनाकर मंद अग्नि पर पकाएं. जब दूध मात्र शेष रह जाने पर छानकर उसमें 6 ग्राम गोघृत मिलाकर दिन में दो बार सुबह शाम सेवन करने से खुश्क खांसी अथवा वेग पूर्वक चलने वाली खांसी दूर होती है.

5. बादाम की गिरी 8 नग तथा मिश्री और गाय का मक्खन 20-20 ग्राम लेकर सभी को एकत्र कर और घोटकर सुबह शाम दिन में दो बार चाटने से खुश्क खांसी में बहुत लाभ मिलता है.

खांसी की दवा होम्योपैथिक 


होम्योपैथिक पद्धति में निम्नलिखत कुछ दवाओं से खांसी का इलाज किया जाता है-

1. रसटाक्स 30:- यह भीग जाने के कारण उठने वाली तर खांसी की लाभकारी औषधि है. इसको दिन में तीन बार सेवन करने के निर्देश दिए जाते है.

2. स्टैनम 30:- यह तर खांसी, थोड़ा सा बोलते हो खांसी उठना, छाती में खालीपन का अनुभव, कफ का स्वाद मीठा व नमकीन तथा कफ का रंग अंडे की सफेदी जैसा अथवा पीलापन लिए हरा रंग होना आदि लक्षणों में हितकारी है. इसको डॉक्टर अक्सर दिन में तीन बार सेवन करने की सलाह देते है.

3. हिपर सल्फर 30:- ठंडी हवा लगने से उत्पन्न क्रूप खांसी (जो मध्य रात्रि से प्रात: काल तक बढ़ती हो) घूंट लेने, रोने, बोलने, सोने, पानी पीने, खुश्क और ठंडी हवा में रोग बढ़ना तथा गर्म और तर हवा में रोग बढ़ने के लक्षणों में दिन में 3 बार सेवन कराई जाती है.

4. एंटिमटार्ट 30:- बलगम जमा होने के कारण फेफड़े में घर-घर शब्द सुनाई देना, स्वर भंग युक्त सूखी खांसी या गला घरघराने वाली तर खांसी, बच्चों व वृद्धों की खांसी, खांसते-खांसते रोगी का हांफने लग जाना, कभी कभी फेनयुक्त बलगम निकलना फेफड़ों की कमज़ोरी के कारण कफ निकालने आदि के लक्षणों में दिन में 3 बार सेवन करने की सलाह दी जाती है.

5. ऐमोनियम कार्ब 6:- छाती और श्वास नली में बलगम अटकने के कारण स्वास लेने में भारीपन, प्रात: के तक़रीबन 3 बजे कष्टयुक्त खांसी का आना तथा उस समय दम घुटता सा प्रतीत होना, दो कदम की चढ़ाई भी ना चढ़ पाना. कफ सीने व फेफड़े में अत्यधिक रूप से भर जाने के कारण निकालने में कठिनाई आदि लक्षणों में दिन में तीन बार सेवन कराई जाती है.

खांसी की दवा यूनानी 


यूनानी पद्धति में खांसी की दवा उपलब्ध है जो खांसी मिटाने में उपयोगी सिद्ध होती है. यूनानी पद्धति से निम्नलिखित दवाओं से खांसी का ईलाज किया जाता है-

1. कुर्स सुफ्रा:- इस औषधि की वयस्कों को 2 टिकिया दिन में 3 बार, बच्चों को 1 टिकिया दिन में 3 बार तथा छोटे शिशुओं को आधी टिकिया दिन में तीन बार देने की सलाह दी जाती है. (वयस्कों और बच्चों को यह टिकिया चुसकर तथा शिशुओं को यह टिकिया गुनगुने जल में घोलकर सेवन करने की सलाह दी जाती है).

विशेष:- यदि रोगी को खांसी के साथ गले में दर्द भी हो तो उसे दिन में 2-3 बार नमक मिले गर्म जल से अथवा शहतूत की पत्तियों को गर्म जल में उबालकर कुल्ले (गरारे) करवाए.

2. इक्सीर सुआल (निर्माता हमदर्द) 1 टिकिया तोड़कर चूरा करके 10 ग्राम शहद में मिलाकर सेवन करनी चाहिए. यह दवा छाती में जमे हुए बलगम को निकलती है और खांसी दूर करती है.

3. लऊक-आव-तरबूज़ वाला (निर्माता हमदर्द) 19-19 ग्राम दवा सुबह शाम दिन में दो बार सेवन से सूखी खांसी तथा टीबी रोग में लाभ लाभ होता है.

4. लऊक मोतदिन निर्माता हमदर्द 10-10 ग्राम दवा दिन में 3 बार (सुबह, दोपहर और शाम को) सेवन करने से नजले से उत्पन्न खांसी में हितकारी साबित होती है.

5. लऊक समपिस्ता निर्माता हमदर्द 10 से 20 ग्राम तक यह दवा प्रात: व रात्रि को समय गर्म जल अथवा इसी दवा कंपनी द्वारा निर्मित 'अर्क गबजबा' 125 मिली में अच्छी तरह उबालकर पिलाए. यह नजले की खांसी की कठोरता में आराम देता है तथा कफ को बाहर निकालता है. नजला-जुकाम में यह औषधि हितकारी है.

खांसी के लिए बायोकैमिक 


1. कालिम्यूर 6x:- यदि खांसी के तीव्र दौरे के बाद बलगम निकले और बलगम में गंध हो तो इस औषधि का सेवन हितकारी रहता है.

2. साइलीशिया 6x:- यदि सर्दी की ऋतु में खांसी बढ़ जाए, कफ का स्वाद नमकीन हो तथा कफ मुश्किल से निकले तो इन लक्षणों में इसका उपयोग लाभप्रद होता है.

3. नैट्रम सल्फ 30x:- वर्षा अथवा ठण्ड के कारण खांसी का बढ़ना, बलगम का रंग पीला, छाती दबने पर आराम की अनुभूति ऐसे लक्षणों में इसका उपयोग किया जाता है. 

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